22 January, 2017
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आपको एक और झटका देने वाली है मोदी सरकार,जानिए कैसे

Daily News Network Posted: 2016-12-23 13:16:24 IST Updated: 2016-12-23 13:16:24 IST
नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद मोदी सरकार आपको एक और झटका देने वाली है। सरकार पीपीएफ के साथ अन्य छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर में कटौती करने वाली है। समाचार पत्र इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अगर सरकार गोपीनाथ समिति के फॉर्मूले का अनुसरण करती है तो छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर में करीब 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती हो सकती है।

ऐसा हुआ तो छोटी बचत की योजनाओं पर ब्याज दर गिरकर 7 फीसदी पर पहुंच जाएगी। गौरतलब है कि गोपीनाथ समिति ने सरकारी बॉन्ड्स की प्राप्तियों के मुताबिक छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें तय करने का सुझाव दिया है। इस सुझाव के मुताबिक पिछले तीन महीने से छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर अभी सरकारी बॉन्ड्स पर बराबर अवधि में मिलने वाले ब्याज से थोड़ा ज्यादा है। पीपीएफ के मामले में 10 साल की औसत सरकारी बॉन्ड यील्ड से 25 बेसिस प्वाइंट ज्यादा है।

10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड गिरकर 6.5 फीसदी पर पहुंच गई है। पिछले तीन महीने से यह लगातार 7 फीसदी से नीचे पर बरकरार है। दूसरे शब्दों में पीपीएफ रेट जनवरी मार्च तिमाही में 7 फीसदी तक आ सकता है। विश्लेषकों को लगता है कि सरकार छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में इतनी बड़ी कटौती नहीं करेगी जब तक कि नोटबंदी से पैदा हुई छोटी सी सुविधा का असंतोष आगे विकराल रूप धारण नहीं करता है। इन्वेस्टमेंट और टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन कहते हैं कि सरकार ने गोपीनाथ फॉर्मूले को लंबे समय से ठंडे बस्ते में डाल रखा है,इसलिए पीपीएफ रेट में 20 से 25 फीसदी तक की ही कटौती हो सकती है।

हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं है कि पीपीएफ रेट नीचे का रूख ही करेगा। जैन ने कहा,अगर सरकार पीएफ पर ब्याज दर में कटौती करने से बाज नहीं आई तो राजनीतिक रूप से ज्यादा संवेदनशील मसला है तो यह भी लगभग तय है कि पीपीएफ रेट में कटौती से भी सरकार नहीं हिचकिचाएगी। चिंता की बात यह है कि अगर नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट्स जैसी दूसरी छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें कम हुई तो इनकी चमक फीकी पड़ जाएगी। अभी एनएससीज पर 8 फीसदी का ब्याज मिलता है जिसकी बदौलत ये बैंक डिपॉजिट्स से ज्यादा आकर्षक बने हुए हैं।