22 January, 2017
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...तो इसलिए ऐंड्रॉयड फोन पर नहीं देखना चाहिए पॉर्न

Daily News Network Posted: 2016-12-09 15:47:15 IST Updated: 2016-12-09 15:47:15 IST
नई दिल्ली।
भारत में बहुत से लोग इंटरनेट पर पॉर्न देखते हैं। कंप्यूटर और लैपटॉप के बजाय स्मार्टफोन के जरिए ज्यादा लोग इंटरनेट से जुड़ रहे हैं। इसलिए मोबाइल पर पॉर्न देखने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब कई ऐप्स के जरिए पॉर्न देखा जा सकता है। लोग न सिर्फ गूगल प्ले पर मौजूद ऐप्स के जरिए पॉर्न देख रहे हैं, बल्कि वे ब्राउजर पर वेबसाइट्स भी सर्फ कर रहे हैं।

पॉर्न देखने का मामला पूरी तरह से निजी है और देश में इस पर किसी तरह की कानूनी पाबंदी भी नहीं है। मगर फिर भी कुछ वजहें हैं, जिनकी वजह से आपको अपने मुख्य ऐंड्रॉयड स्मार्टफोन पर पॉर्न देखने से बचना चाहिए। आगे जानें, क्या हैं वे वजहें:

अवैध वैल्यु ऐडेड सर्विसेज़ (VAS)
ज्यादातर पॉर्न फ्री होता है, लेकिन कई बार आपको यह महंगा पड़ सकता है। पॉप्युलर पॉर्न वेबसाइट्स गैरकानूनी ढंग से वैल्यु ऐडेड सर्विस जोड़कर पैसा कमाने की ताक में रहती हैं। इसका मतलब यह है कि जैसे ही आप कुछ वेबसाइट्स को अपने ऐंड्रॉयड स्मार्टफोन पर खोलते हैं, वैल्यु ऐडेड सब्स्क्रिप्शन चुपके से अपने आप ऐक्टिविट हो जाता है। इनमें राशिफल, ड्रीम गर्ल पैक जैसे सब्स्क्रिप्शन होते हैं, जो अपने आप ऐक्टिवेट हो जाते हैं। ये दिन में 1 या 5 रुपये काटते रहते हैं या फिर महीने में 35 रुपये काटते हैं। इससे ध्यान भी नहीं जाता कि आपका बैलंस कम हो रहा है या बिल बढ़ रहा है।

पॉर्न टिकर
पॉर्न टिकर ऐंड्रॉयड की पुरानी समस्या है। ये दरसअल पॉप्युलर ऐप्स के नकली वर्जन होते हैं। देखने में आपको ये जेनुइन ऐप जैसे ही लगेंगे। अगर आप अपने ऐंड्रॉयड मोबाइल पर पॉर्न देखेंगे और उसके बाद प्ले स्टोर से पॉप्युलर गेम्स डाउनलोड करेंगे, पॉर्न टिकर अपने आप को पॉप्युलर गेम्स के रूप में पेश कर देंगे। अगर कोई इनके ऊपर टैप करेगा तो उसके स्मार्टफोन पर वायरस डाउनलोड हो जाएगा।

सिक्यॉरिटी और प्रिवेसी को है बड़ा खतरा
जिस ऐंड्रॉयड स्मार्टफोन पर आपने अपनी मुख्य जीमेल आईडी के साथ लॉगइन किया होता है, उस पर पॉर्न देखना खतरनाक साबित हो सकता है। आपके उस स्मार्टफोन की सिक्यॉरिटी और प्रिवेसी को साइबर क्रिमिनल्स खतरे में डाल सकते हैं।

Ransomwares से मांगी जा सकती है फिरौती
पॉर्न साइट्स में कुछ ऐसे वायरस होते हैं, जो आपके डिवाइस को लॉक कर देंगे और फिर उसे अनलॉक करने के बदले आपसे पैसे मांगेंगे। आजकल इस तरह के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। एक बार आप फंस गए तो आपके डिवाइस में मौजूद डेटा साइबर क्रिमिल्स के पास होगा। इस बात की भी गारंटी नहीं है कि वे आपसे पैसे लेने के बाद डिवाइस को अनलॉक कर देंगे या डेटा सुरक्षित रखेंगे।