बड़ी राजनीतिक उथल पुथल, मेघालय के गवर्नर करेंगे 17 विधायकों के भाग्‍य का फैसला

Daily news network Posted: 2017-11-15 10:39:26 IST Updated: 2017-11-15 10:39:26 IST
बड़ी राजनीतिक उथल पुथल, मेघालय के गवर्नर करेंगे 17 विधायकों के भाग्‍य का फैसला
  • आज मेघालय के गवर्नर करेंगे 17 विधायकों के भाग्‍य का फैसला जी हां आज राजभवन पर सभी की निगाहें टिकी हैं कि पिछले सप्‍ताह हाई कोर्ट द्वारा संसदीय सचिवों की नियुक्ति को मेघालय विधानसभा की सदस्यता के लिये अयोग्य ठहराए जाने के बाद अब राज्‍यपाल का फैसला क्‍या होगा।

शिलोंग

आज मेघालय के गवर्नर करेंगे 17 विधायकों के भाग्‍य का फैसला जी हां आज राजभवन पर सभी की निगाहें टिकी हैं कि पिछले सप्‍ताह हाई कोर्ट द्वारा संसदीय सचिवों की नियुक्ति को मेघालय विधानसभा की सदस्यता के लिये अयोग्य ठहराए जाने के बाद अब राज्‍यपाल का फैसला क्‍या होगा।


मुख्य न्यायाधीश दिनेश माहेरी और न्यायमूर्ति वेद प्रकाश वैश की पीठ ने प्रदेश के राज्यपाल को 17 संसदीय सचिवों को अयोग्‍‍‍य ठहराने पर फैसला करने की अनुमति दे दी। राजभवन के अधिकारी ने बताया कि गर्वनर गंगा प्रसाद हाईकोर्ट के आदेश पर राज्‍य सरकार और विधानसभा स्‍पीकर के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। अधिकारी ने बताया, अब तक गर्वनर सरकार और असेंबली स्‍पीकर के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं। निर्देश मिलते ही गर्वनर चुनाव आयोग से इस मामले पर सुझाव मांगेंगे।


गौरतलब है कि अगर राज्यपाल गंगा प्रसाद ने अगर 17 संसदीय सचिवों को विधानसभा से अयोग्य करार दे दिया तो कांग्रेस की सरकार अल्पमत में आ जाएगी। इन 17 संसदीय सचिवों में कांग्रेस के 8, 8 निर्दलीय और एक एनसीपी का विधायक शामिल है। मेघालय में अगले साल विधानसभा चुनाव है। 60 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 29 विधायक हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने निर्दलियों व एनसीपी के सहयोग से गठबंधन सरकार बनाई थी।


आपको बता दें कि 9 नवंबर को मेघालय हाई कोर्ट ने संसदीय सचिव (नियुक्ति, वेतन, भत्ते और अन्य प्रावधानों),एक्ट 2005 को अवैध करार दिया था। हाईकोर्ट ने यह आदेश 9 नवंबर को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया था। हाईकोर्ट ने इन विधायकों की विधानसभा की सदस्यता खत्म करने का फैसला राज्यपाल पर छोड़ दिया था। जनहित याचिका पश्चिम तैंतिया हिल डिस्ट्रिक्ट के निवासी एम.सुमेर ने दाखिल की थी।


जनहित याचिका में अधिनियम की वैधता को चुनौती दी गई थी। सुमेर का कहना था कि संसदीय सचिव का पद संभालने वाले विधायकों को अयोग्य करार दिया जाना चाहिए। सुमेर ने सोमवार को राज्यपाल गंगा प्रसाद से राजभवन में मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। इसमें राज्यपाल से उन विधायकों को अयोग्य करार देने का अनुरोध किया गया है जो संसदीय सचिव के पद पर थे। चीफ जस्‍टिस दिनेश माहेश्‍वरी और जस्‍टिस वेद प्रकाश वैश वाले डिविजन बेंच ने यह फैसला सुनाया है।