मणिपुर: सीएम के बेटे ने किया था मर्डर, 6 साल बाद भी इंसाफ नहीं मिला

Daily news network Posted: 2017-05-19 18:09:13 IST Updated: 2017-05-19 18:09:13 IST
मणिपुर: सीएम के बेटे ने किया था मर्डर, 6 साल बाद भी इंसाफ नहीं मिला
  • इस हत्याकांड को 6 साल हो गए हैं लेकिन अभी तक रोजर को इंसाफ नहीं मिल पाया है। रोजर का परिवार इंसाफ के लिए दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।

इंफाल। मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के बेटे ने 2011 में 19 साल के इरोम रोजर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड को 6 साल हो गए हैं लेकिन अभी तक रोजर को इंसाफ नहीं मिल पाया है। रोजर का परिवार इंसाफ के लिए दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। 



रोजर के परिजनों ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने की कोशिश की। परिवार ने न्याय की मांग करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय को ज्ञापन सौंपा। रोजर की 56 वर्षीय मां चित्रा देवी के आंसू अभी तक थमे नहीं है। वह बताती है कि किस तरह एक ताकतवर नेता के बेटे ने उसकी जिंदगी तबाह कर दी। 2011 में होली के दौरान रोजर की हत्या की गई थी। रोजर ने बीरेन सिंह के बेटे एन.अजय की एसयूवी को ओवरटेक नहीं करने दिया।  इसके चलते अजय ने रोजर को गोली मार दी। अस्पताल ले जाते वक्त उसकी मौत हो गई। उस वक्त हत्या के विरोध में प्रदर्शनों के चलते की कैबिनेट ने केस की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की। 




जांच के बाद सीबीआई ने मुख्य आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने जून 2012 में आरोप तय किए। 2011 में जब रोजर की हत्या की गई तब बीरेन सिंह कांग्रेस सरकार में  मंत्री थे। उस वक्त मुख्यमंत्री इबोबी सिंह थे। स्थानीय कोर्ट ने जनवरी 2017 में अजय को पांच साल कैद की सजा सुनाई थी। मुख्यमंत्री के बेटे ने निचली अदालत की ओर से सुनाई गई सजा को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए अपील की जबकि सीबीआई ने कोई अपील नहीं की। पीडि़त परिवार का आरोप है कि मणिपुर का कोई भी वकील उनका केस लडऩे के लिए तैयार नहीं है। जब सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में उत्सव सिंह बैंस को वकील किया तो उन्होंने दावा किया कि बैंस को कई अंडरग्राउंड ग्रुप्स धमकियां दे रहे हैं। परिवार के रिश्तेदार बिरजीत को तीन दिन पहले रात को उसके घर से उठा लिया गया। 




चित्रा देवी कहती है कि मेरे वकील को एयरपोर्ट से बिरजीत ने पिक किया जो मेरा रिश्तेदार है। तीन दिन पहले बिरजीत को मणिपुर पुलिस के कमांडोज ने यह कहते हुए गिरफ्तार किया कि वह माओवादी है। बिरजीत की गिरफ्तारी से मैं डर गई। इंफाल में मेरे घर के नजदीक हमेशा पुलिस के दो वाहन तैनात रहते हैं। मैं बहुत डरी हुई हैं। मैं न्याय चाहती हूं,मैंने बहुत संघर्ष किया है। मेरी पारिवारिक जिंदगी खत्म हो गई है। सब कुछ खत्म हो चुका है। सामाजिक कार्यकर्ता बीना लक्ष्मी का कहना है कि मैं भी डरी हुई हैं। बीना लक्ष्मी उन कुछ लोगों में शामिल है जो चित्रा की मदद के लिए आगे आई हैं।





बकौल बीना लक्ष्मी, वे हम पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वे हमें रोकने के लिए सब कुछ कर रहे हैं। यहां एक मां अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए लड़ाई लड़ रही है। बैंस ने हाल ही में गृह सचिव को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने धमकी भरी कॉल के बाद पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने की मांग की थी। परिवार ने अब कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ इंडिया गेट पर धरना देने का फैसला किया है। परिवार का कहना है कि जब तक केन्द्र सरकार उनकी सुनवाई नहीं करती तब तक धरना जारी रहेगा।