मणिपुर में भाजपा के 8 संसदीय सचिवों ने दिए इस्तीफे, सीएम ने किए स्वीकार

Daily news network Posted: 2017-07-18 12:35:01 IST Updated: 2017-07-18 12:35:01 IST
मणिपुर में भाजपा के 8 संसदीय सचिवों ने दिए इस्तीफे, सीएम ने किए स्वीकार
  • मणिपुर में भाजपा के आठ संसदीय सचिवों ने बीती रात मुख्यमंत्री एन.बीरेन सिंह को अपने इस्तीफे सौंपे।

इंफाल।

मणिपुर में भाजपा के आठ संसदीय सचिवों ने बीती रात मुख्यमंत्री एन.बीरेन सिंह को अपने इस्तीफे सौंपे। मुख्यमंत्री ने तुरंत इन्हें स्वीकार कर लिया। मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने 23 मार्च को 12 संसदीय सचिव नियुक्त किए थे। बीरेन सिंह ने उनको संसदीय सचिव नियुक्त किया था जिन्हें मंत्री पद नहीं मिल पाया था। चार संसदीय सचिवों ने इस्तीफा नहीं दिया है। इनमें नगा पीपुल्स फ्रंट(एनपीएफ) के तीन और एक निर्दलीय संसदीय सचिव शामिल है। मार्च में हुए विधानसभा चुनाव में एनपीएफ के चार विधायक चुनकर आए थे, इनमें से एक  को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था।


संसदीय सचिवों के इस्तीफे और मुख्यमंत्री की ओर से इस्तीफे स्वीकार किए जाने की पुष्टि करते हुए सूत्र ने बताया कि भाजपा और बीरेन सिंह सरकार की नीति के समर्थन में संसदीय सचिवों ने इस्तीफे दिए हैं। सूत्र ने बताया कि इस्तीफे से पार्टी और सरकार के लिए सामने कोई समस्या उत्पन्न नहीं होगी। उन्होंने पार्टी की नीति और निर्देशों के मुताबिक इस्तीफे दिए हैं। वे भाजपा के वफादार विधायक बने रहेंगे। लोगों को इस घटनाक्रम को पार्टी और सरकार में संकट के रूप में नहीं लेना चाहिए। सरकार में सब कुछ ठीक है। जिन्होंने संसदीय सचिव पद से इस्तीफा दिया है उनमें एल.याइमा(खुरई विधानसभा क्षेत्र).एस.सुभाषचंद्रा (नाओरिया पाखांगलाकपा), एल.रामेशोर (कैराओ), के.रोबिंद्रो (मयांग इंफाल) . टी. सैत्याबरा (यासकुल)  , एच.डिंगो (सेकमई) , एन.इंद्रजीत(क्षेत्रिगाओ) और सपन रंजन(कोंथाउजाम)शामिल है। एक अन्य सूत्र ने कहा है कि मुख्य मंत्री की सलाह पर संसदीय सचिवों ने इस्तीफे दिए हैं।




एक संसदीय सचिव ने कहा कि फैसला बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार की फंक्शनिंग को मजबूत करने के लिए लिया गया है। सूत्र के मुताबिक संसदीय सचिवों ने इसलिए इस्तीफे दिए हैं ताकि उन्हें कुछ असेंबली की कुछ समितियों का सदस्य और चेयरमैन नियुक्त किया जा सके। अगर वे संसदीय सचिव बने रहते तो उन्हें विधानसभा की समितियों का सदस्य और चेयरमैन नियुक्त नहीं किया जा सकता था। विधानसभा का पूर्ण बजट सत्र गुरुवार से शुरू होगा। इस दौरान कुछ समितियां गठित की जा सकती है। सत्तारुढ़ पार्टी चाहती है कि पार्टी के ज्यादा से ज्यादा विधायकों को समितियों में सदस्य और चेयरमैन के रूप में नियुक्त किया जाए। पार्टी सूत्र का कहना है कि इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री शायद ही तुरंत भाजपा के विधायकों को संसदीय सचिव के रूप में शामिल करें।