मेघालय में विधानसभा सत्र शुरु होने से पहले इस्तीफा देंगे 9 विधायक!

Daily news network Posted: 2017-11-13 18:32:13 IST Updated: 2017-11-13 18:32:13 IST
मेघालय में विधानसभा सत्र शुरु होने से पहले इस्तीफा देंगे 9 विधायक!
  • मेघालय में अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी को तगड़ा झटका लगने वाला है।

शिलॉन्ग।

मेघालय में अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी को तगड़ा झटका लगने वाला है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक करीब 9 विधायक नवंबर के आखिरी सप्ताह या दिसंबर के पहले सप्ताह में इस्तीफा दे सकते हैं। ये विधायक नेशनल पीपुल्स पार्टी(एनपीपी) में शामिल होंगे और एनपीपी के टिकट पर ही अगला विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। कहा जा रहा है कि जो 9 विधायक एनपीपी में शामिल होने जा रहे हैं वे विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले ही इस्तीफे दे सकते हैं।

विधानसभा का सत्र अगले माह प्रस्तावित है। सूत्रों ने खुलासा किया है कि नौ विधायक या तो नवंबर के आखिरी सप्ताह या दिसंबर के पहले सप्ताह में इस्तीफा दे सकते हैं। जो विधायक इस्तीफा देने जा रहे हैं उनमें कांग्रेस, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी(यूडीपी) और कुछ निर्दलीय हैं। जो सात विधायक नेशनल पीपुल्स पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं वे हैं उप मुख्यमंत्री रॉवेल लिंगदोह, पूर्व मंत्री प्रेस्टोन ताइनसोंग और एस.धर, कांग्रेस विधायक एन.धर, यूडीपी विधायक रेमिंग्टन पाइनग्रोप और दो निर्दलीय विधायक एस.मुखीम और एच.बामोन।

उप मुख्यमंत्री रॉवेल लिंगदोह मॉवकाइरवात से विधायक हैं। एन.धर उमरोई से, रेमिंग्टन पी. मावकाइनरु से विधायक है। एस.मुखीम अमलारेम और एच.बामेन सुतंगा-सईपुंग से विधायक है। एनपीपी के सूत्रों का कहना है कि दो और विधायकों ने भी पार्टी में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की है।

इसके लिए उन्होंने अपने दूत भेजे हैं। हालांकि दोनों विधायकों की पहचान का खुलासा नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक सभी नौ विधायक उसी दिन इस्तीफा दे सकते हैं। इस बीच संसदीय सचिव पद से इस्तीफा देने वाले 10 विधायकों का कहना है कि विधानसभा की सदस्यता से उनको अयोग्य करा दिए जाने का कोई ग्राउंड नहीं है।

9 नवंबर को मेघालय हाईकोर्ट ने संसदीय सचिवों की नियुक्ति वाले कानून को अवैध करार दिया था। हाईकोर्ट ने उन्हें विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दिए जाने का फैसला राज्यपाल पर छोड़ दिया था। आपको बता दें कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद 10 विधायकों ने संसदीय सचिव पद से इस्तीफा दे दिया था।