बौखलाए ड्रैगन ने अरुणाचल के 6 जिलों के नाम बदलने का किया ऐलान

Daily news network Posted: 2017-04-19 14:34:31 IST Updated: 2017-04-19 14:35:30 IST
बौखलाए ड्रैगन ने अरुणाचल के 6 जिलों के नाम बदलने का किया ऐलान
  • तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के भारत दौरे से बौखलाए चीन ने अरुणाचल प्रदेश के करीब छह जगहों का नाम बदल दिया

नई दिल्ली।

तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के भारत दौरे से बौखलाए चीन ने अरुणाचल प्रदेश के करीब छह जगहों का नाम बदल दिया है। चीन के सिविल अफेयर्स मंत्रालय इसकी जानकारी दी। एक अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक इन जगहों के नाम वोगेंलिंग, मिला री, क्यूएडेनगार्बो री, मेंकुआ, ब्यूमाला और नमकापबरी है। चीन का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है और इसके चलते उस क्षेत्र पर उसका अधिकार है।


अरुणाचल प्रदेश के छह जगहों को नया नाम दिए जाने का मामला उस वक्त सामने आया, जब एक दिन पहले ही भारत ने दलाई लामा के मुद्दे पर चीन को आड़े हाथों लेते हुए उसे चुप रहने की नसीहत दी थी। कुछ दिन पहले ही दलाई लामा अरुणाचल प्रदेश के तवांग गए थे, जिस पर चीन ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। चीन का कहना था कि भारत के इस फैसले से दोनों देशों के संबंधों पर गलत असर पड़ेगा। चीन ने भारत को कड़ी चेतावनी देते हुए यह तक कह दिया था कि वह अपनी सीमा के स्वतंत्रा के लिए कुछ भी कर सकता है। अनुमान के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश के हिस्सों का नाम बदलने के पीछे भी उसकी यही रणनीति है। एक चीनी प्रोफेसर जियोंग कुंशिन की बात को मानें तो यह क्षेत्र काफी लंबे समय से दक्षिण तिब्बत के नाम से जाना जाता है, लेकिन पहली बार इसका नाम बदला गया है। हालांकि चीन अरुणाचल के जिस हिस्से तो अपना हिस्सा मानता है उसे वो कभी आधिकारिक तौर पर साबित नहीं कर पाया है।


गौरतलब है की चीनी मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत के हिस्से के रूप में दिखाया गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चीन ने दक्षिण तिब्बत के 6 क्षेत्रों के नामों का मानकीकरण किया है, जो उसके मुताबिक चीनी क्षेत्र का हिस्सा है, लेकिन इसके कुछ क्षेत्रों पर भारत का अनाधिकृत कब्जा है। बता दें कि चीन शुरुआत से ही अरुणाचल प्रदेश पर अपना हक जमाता रहा है। भारत और चीन के बीच करीब 3488 किमी के क्षेत्र पर विवाद बना हुआ है। यह क्षेत्र लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल से लगता हुआ है। इस विवाद के कारण ही भारत और चीन के रिश्तो में तनातनी बनी रहती है। 1962 के युद्ध के बाद से ही इस क्षेत्र पर चीन ने अपना कब्जा जमाया हुआ है। इस विवाद को सुलझाने के लिए अब तक करीब 19 बार वार्ता हो चुकी है।