त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी साजिश का खुलासा

Daily news network Posted: 2017-05-19 10:46:25 IST Updated: 2017-05-19 10:46:25 IST
त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी साजिश का खुलासा
  • एक अधिकारी ने बताया कि प्रतिबंधित संगठन नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में अशांति फैलाने के लिए रीग्रुप की कोशिश कर रहा है

अगरतला।

त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। राज्य पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि प्रतिबंधित संगठन नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा(एनएलएफटी)विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में अशांति फैलाने के लिए रीग्रुप की कोशिश कर रहा है। वरिष्ठ अधिकारी ने खुफिया रिपोर्ट के हवाले से बताया कि एनएलएफटी ने हाल ही में सुबीर देबबर्मा को अपना अध्यक्ष बनाया है। इससे पहले बिश्वमोहन देबबर्मा अध्यक्ष था। उन्हें सलाहकार नियुक्त किया गया है। 




अधिकारी के मुताबिक दक्षिण पूर्व बांग्लादेश के चिटगांव हिल्स ट्रेक्ट्स में स्थित एनएलएफटी अगले विधानसभा चुनाव से पहले दिक्कतें पैदा करने के लिए खुद को रीग्रुप करने की कोशिश कर रहा है। दक्षिण त्रिपुरा में सोमवार को एक रैली को संबोधित करते हुए राज्य के मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने एनएलएफटी के नेतृत्व में परिवर्तन की पुष्टि की थी और इसके पुनरुत्थान को लेकर चेताया था। सरकार ने कहा था कि विधानसभा चुनाव से पहले हिंसा फैलाने के लिए विपक्षी दलों के नेताओं का एक वर्ग एनएलएफटी के नए नेता से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। इनका गुप्त प्लान है अशांति फैलाना। 




अधिकारी ने बताया कि आतंका फैलाने के बाद 2000 में एनएनएफटी ने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण त्रिपुरा ट्राइबल एरिया ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल पर जबरन कब्जा करने में ट्राइबल ऑर्गेनाइजेशन की मदद की थी। पुलिस अधिकारी ने कहा कि एनएलएफटी के नए सुप्रीमो सुबीर देबबर्मा उर्फ यामोरोक पश्चिम त्रिपुरा के मोहनपुर सब डिवीजन के बारगाचिया इलाके का रहने वाला है। वह लंबे समय से संगठन का सदस्य है। 2013 में उग्रवादियों के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान उसे गिरफ्तार भी किया गया था। 



जमानत पर रिहा होने के बाद फिर से उग्रवादी संगठनों में शामिल होने से पहले वह बांग्लादेश चला गया। सुबीर की पत्नी मिनाती त्रिपुरा में टीचर है और सीएचटी के खाग्राचारी स्थित स्कूल में कार्यरत है। उनके दो बच्चे हैं। अधिकारी ने बताया कि नेतृत्व में परिवर्तन के बावजूद नहीं लगता कि एनएलएफटी सार्वभौम त्रिपुरा की मांग छोड़ेगा। 2009 के बाद से त्रिपुरा में शांति है। ऑफिशियल और अनऑफिशियल रिपोर्ट के मुताबिक 2015 और 2016 के दौरान त्रिपुरा में एक भी उग्रवादी घटना नहीं हुई। 2005 में 115 उग्रवादी घटनाएं सामने आई थी। इनमें 130 लोगों की मौत हुई थी जबकि 65 लोगों को अगवा किया गया था। 1998 में गैरकानूनी उग्रवादी संगठन ने 360 लोगों को मौत के घाट उतारा था। 340 उग्रवादी घटनाओं के तहत 390 लोगों को अगवा किया गया था।