म्यांमार में अभी भी मजबूत आधार है पूर्वोत्तर के सक्रिय उग्रवादियों का

Daily news network Posted: 2017-07-14 11:26:37 IST Updated: 2017-07-14 11:26:37 IST
म्यांमार में अभी भी मजबूत आधार है पूर्वोत्तर के सक्रिय उग्रवादियों का
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र के सक्रिय उग्रवादी संगठनों का अभी भी म्यांमार में मजबूत आधार है। असम राइफल्स को उसके कैंप अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब लाने के निर्देश दिए गए हैं।

नई दिल्ली।

पूर्वोत्तर क्षेत्र के सक्रिय उग्रवादी संगठनों का अभी भी म्यांमार में मजबूत आधार है। असम राइफल्स को उसके कैंप अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब लाने के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच सेना का भी मानना है कि भारत-म्यांमार सीमा पर गतिविधियों की निगरानी के लिए फ्री मूवमेंट रिजाइम को सही तरीके से रेगुलेट करने के लिए कदम उठाने चाहिए।


असम ट्रिब्यून से बातचीत में सेना के वरिष्ठ सूत्रों ने कहा कि म्यांमार में उग्रवादियों की मौजूदगी चिंता का विषय है लेकिन भारत के सुरक्षा बलों और म्यांमार के बीच समन्वय में हाल ही में बहुत सुधार हुआ है यह सकारात्मक घटनाक्रम है। भारत की म्यांमार के साथ 164 किलोमीटर अंतरराष्ट्रीय सीमा है। अंतरराष्ट्रीय सीमा के सुराखदार नेचर के कारण उग्रवादियों का पड़ोसी देश में बेसेज हैं। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए उग्रवादियों को भारत में घुस कर हिंसा फैलाने और वापस अपने शरण स्थलों में जाने का मौका मिल जाता है।


असम राइफल्स सेना के ऑपरेशन कंट्रोल में है। असम राइफल्स को सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। स्थिति में ज्यादा सुधार दिखाई नहीं दिया है। सेना के वरिष्ठ सूत्रों ने खुलासा किया है कि असम राइफल्स को उसके शिविर अंतरराष्ट्रीय सीमा खासतौर पर उन इलाकों में जिनकी पहचान असुरक्षित इलाकों के रूप में की गई है,ताकि उग्रवादियों को नियंत्रित किया जा सके। सेना का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के दोनों तरफ के लोगों का फ्री मूवमेंट अनरेगुलेटेड है,यह बड़ी समस्या है। सूत्रों का कहना है कि दोनों देशों के लोगों के फ्री मूवमेंट को सही तरीके से रेगुलेट करना चाहिए।


इसमें वे राज्य सरकारें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है जिनकी अंतरराष्ट्रीय सीमा म्यांमार से लगती है। सूत्रों का कहना है कि हम यह नहीं कह रहे कि फ्री मूवमेंट रिजाइन,जो युगों से जारी है,को वापस लेना चाहिए लेकिन इसे सही तरीके से रेगुलेट करना चाहिए। ऐसा तंत्र होना चाहिए जिससे पता लग सके कि कौन भारत आ रहा है और कौन वहां(म्यांमार) जा रहा है। सूत्रों ने स्वीकार किया है कि भारत और म्यांमार के सुरक्षा बलों के बीच संबंधों में हाल ही में बहुत सुधार हुआ है। भारत और म्यांमार के आर्मी ऑफिसर्स अक्सर मिलते रहते हैं।



इस दौरान समस्याओं पर चर्चा होती है और जानकारियां भी शेयर करते हैं लेकिन म्यांमार की सेना उग्रवादियों के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई करने में सक्षम नहीं है जबकि नॉर्थ ईस्ट के उग्रवादी पड़ोसी देश के क्षेत्र का इस्तेमाल कर रहे हैं। सूत्रों ने स्वीकार किया कि म्यांमार की सेना की देश के अन्य हिस्सों में खुद की समस्याएं हैं और भारत के साथ लगी सीमा पर उसके कर्मियों की मौजूदगी उतनी मजबूत नहीं है कि वे उग्रवादियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कर सके। म्यांमार की सेना ने वहां उग्रवादियों के शिविरों से डील करने में भारत को आश्वासन दिया है लेकिन यह समस्या तब तक रहेगी जब तक म्यांमार की सेना उन इलाकों में अपनी मौजूदगी को नहीं बढ़ा लेती जहां उग्रवादियों के बेसेज हैं।