असम में मां-बाप की देखभाल नहीं करने वालों की कटेगी सैलरी

Daily news network Posted: 2017-09-16 11:09:44 IST Updated: 2017-09-16 11:09:44 IST
असम में मां-बाप की देखभाल नहीं करने वालों की कटेगी सैलरी
  • असम विधानसभा ने शुक्रवार को बुजुर्गों से जुड़ा एक अहम विधेयक पारित किया। बिल के मुताबिक सरकारी कर्मचारियों के लिए ये जरूरी होगा कि वे अपने अभिभावकों और दिव्यांग भाई बहनों की सही तरीके से देखभाल करें।

गुवाहाटी। असम विधानसभा ने शुक्रवार को बुजुर्गों से जुड़ा एक अहम विधेयक पारित किया। बिल के मुताबिक सरकारी कर्मचारियों के लिए ये जरूरी होगा कि वे अपने अभिभावकों और दिव्यांग भाई बहनों की सही तरीके से देखभाल करें। अगर कोई सरकारी कर्मचारी ऐसा नहीं करता है तो सरकार उसकी सैलरी में से हर महीने 10 फीसदी रकम काट ली जाएगी। यह पैसा उस कर्मचारी के माता पिता या दिव्यांग भाई बहनों पर खर्च होगा। बता दें कि इस तरह का कानून बनाने वाला असम देश का पहला राज्य है। 


शुक्रवार को पेश असम कर्मचारी अभिभाव जवाबदेही एवं निगरानी विधेयक 2017 को 126 सदस्यों वाली असम विधानसभा ने ध्वनिमत से पारित किया। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून बन जाएगा। असम कर्मचारी अभिभाव जवाबदेही एवं निगरानी विधेयक 2017 को असम एम्पलॉयीज प्रमाण बिल के नाम से जाना जाता है। बिल के प्रावधानों के मुताबिक अगर राज्य सरकार का कोई कर्मचारी अपने माता पिता की जिम्मेदारी उठाने से भागता है तो सरकार उसकी सैलरी का 10 फीसदी हिस्सा काट लेगी और उसे मां-बाप के खाते में ट्रांसफर कर देगी। अगर कर्मचारी का कोई भाई या बहन दिव्यांग है तो उसकी सैलरी से 5 फीसदी अतिरिक्त कटौती होगी। 


राज्य के वित्त मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सदन में यह विधेयक पेश करते हुए कहा कि ऐसे उदाहरण भी सामने हैं जिनमें माता पिता ओल्ड एज होम में रहते हैं और उनके बच्चे उनकी देखभाल नहीं कर रहे हैं। इस विधेयक का मकसद राज्य कर्मचारियों के निजी जीवन में हस्तक्षेप करना नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि अनदेखी किए जाने की स्थिति में माता पिता या दिव्यांग भाई बहन कर्मचारियों के विभाग में शिकायत कर सकते हैं। 


सरमा ने कहा कि उनकी सरकार को यह मंजूर नहीं है कि कोई भी शख्स अपने बुजुर्ग मां-बाप को ओल्ड एज होम में छोड़कर जाए। उन्होंने दावा किया कि इस तरह का कानून बनाने वाला असम देश का पहला राज्य है। सरमा ने कहा कि बाद में सांसदों,विधायकों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और असम में संचालित निजी कंपनियों के कर्मचारियों के लिए भी एक ऐसा ही विधेयक पेश किया जाएगा। बता दें कि असम सरकार ने बजट सत्र में इस तरह का बिल लाने का वादा किया था। 


सरकार का कहना था कि असम के कई ओल्ड एज होम से इस तरह की शिकायतें मिल रही है कि अच्छी नौकरी पाने वाले सरकारी कर्मचारियों ने अपने अभिभावकों को छोड़ दिया है। फरवरी में मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा था कि उनकी सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और इस सामाजिक समस्या को दूर करने के लिए कानून बनाएगी। सरकार ने कहा कि कानूनी उम्र से पहले शादी करने वालों को राज्य में सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।