राफिया नाज के समर्थन में असम के मौलवी,तस्वीरें हुई थी वायरल

Daily news network Posted: 2017-11-14 18:52:21 IST Updated: 2017-11-14 18:52:21 IST
राफिया नाज के समर्थन में असम के मौलवी,तस्वीरें हुई थी वायरल
  • झारखंड की राफिया नाज को पिछले 15 दिन से मुस्लिम कट्टरपंथी जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। इसके बावजूद योग शिक्षिका राफिया नाज बेखौफ है।

गुवाहाटी।

झारखंड की राफिया नाज को पिछले 15 दिन से मुस्लिम कट्टरपंथी जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। इसके बावजूद योग शिक्षिका राफिया नाज बेखौफ है। हाल ही में राफिया नाज के घर पर अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया था। इसके बाद झारखंड सरकार ने उनके घर पर पुलिस के दो गार्ड तैनात कर दिए थे। राफिया नाज ने हाल ही में योग गुरु बाबा रामदेव के साथ मंच साझा किया था। इसके बाद उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। इस बीच असम से एक मुस्लिम मौलवी और कलाकार व योग इंस्ट्रक्टर राफिया नाज के समर्थन में उतर आए हैं। मंगलदई बेस्ड अल जमीयत उल बनात मदरसा के प्रमुख मुफ्ती नसिहुर रहमान ने शनिवार को कहा कि योग का धर्म से कोई लेना देना नहीं है।

स्वस्थ रहने के लिए कोई भी योग कर सकता है। चाहे कोई भी धर्म हो, हर किसी को योग करना चाहिए। मुझे पीठ में दर्द की समस्या थी। मैंने योग किया और मेरा पीठ का दर्द ठीक हो गया। बताया गया है कि एक महिला को प्रताडि़त किया गया और उसेधमकाया गया सिर्फ इसलिए क्योंकि वह योग सिखाती है। कलाकार व योग प्रैक्टिसनर मेहनाच उम्मेद अली सरमा भाराली जो फिलहाल हैदराबाद में रह रहे हैं, राफिया के उत्पीडऩ को लेकर आई खबरों से हैरान हैं। उन्होंने कहा, जो कुछ रांची में हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। कुछ लोग फिजिकल एक्सरसाइज के निष्छल रूप को धार्मिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। मुझे खुद योग से फायदा हुआ है और मैं पूरी तरह से राफिया नाज का समर्थन करता हूं। कुरान नहीं कहती कि मुस्लिम योगा नहीं कर सकते।

राफिया का कहना है कि वो अपने मन से योग करती है, किसी मजबूरी में नहीं। राफिया रांची में हटिया के डोरंडा इलाके की रहने वाली है। राफिया नाज योग सिखाकर अपनी आजीविका चलाती है। योग सिखाने के चलते उनके खिलाफ कथित तौर पर फतवे के जरिए धमकाया गया। राफिया का कहना है कि योग करना हराम नहीं है, ये स्वस्थ शरीर और मन के लिए किया जाने वाला व्यायाम है। योग को धर्म से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।

ये आपके ऊपर निर्भर करता है कि योग करते समय ओम का उच्चारण करें या अपने आराध्य का। एक व्यक्ति जो दवा लेने कैमिस्ट के पास जाता है तो उसे धर्म पूछकर दवा नहीं दी जाती। फिर योग जैसा व्यायाम करने के लिए धर्म कैसे बीच में आ गया। इस्लाम में योग या किसी अन्य शारीरीक व्यायाम करने की मनाही नहीं है। बशर्ते आप उसे किस मकसद से कर रहे हैं। योग करने का मकसद शारीरिक स्फूर्ति व सेहत होना चाहिए। योग के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।