रोहिंग्या मुस्लिमों के घुसपैठ की आशंका, असम राइफल्स के जवान हाई अलर्ट पर

Daily news network Posted: 2017-09-15 12:03:55 IST Updated: 2017-09-15 12:03:55 IST
रोहिंग्या मुस्लिमों के घुसपैठ की आशंका, असम राइफल्स के जवान हाई अलर्ट पर
  • म्यांमार से रोहिंग्या मुस्लिमों के घुसपैठ की आशंका के चलते भारत म्यांमार सीमा पर तैनात असम राइफल्स के जवानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

शिलॉन्ग/इंफाल।

म्यांमार से रोहिंग्या मुस्लिमों के घुसपैठ की आशंका के चलते भारत म्यांमार सीमा पर तैनात असम राइफल्स के जवानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अत्यधिक हिंसा के बाद म्यांमार के राखिने प्रांत से लाखों रोहिंग्या मुस्लिम भाग गए हैं। उनमें से कई शरण के लिए बांग्लादेश में घुसे हैं। असम राइफल्स की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि म्यांमार के नागरिकों को देश में घुसने से रोकने के लिए असम राइफल्स के जवान हाई अलर्ट पर है। असम राइफल्स के जवान खास तौर पर पूर्वोत्तर के उन पहाड़ी जिलों में हाई अलर्ट पर

  हैं, जिनकी सीमा म्यांमार से लगती है।


अंतरराष्ट्रीय सीमा क्रॉस कर अवैध प्रवासी घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं। भारत-म्यांमार सीमा पर गश्त पिछले तीन दिनों में बढ़ा दी गई है। अभी तक कोई भी अवैध प्रवासी न डिटेक्ट हुआ है और न ही किसी को इंटरसेप्ट किया गया है।  दक्षिण मिजोरम के सीमावर्ती कस्बे मोरेह को उच्च प्राथमिकता दी जा रही है। असम राइफल्स के जवान म्यांमार से लगने वाली 1624 किलोमीटर लंबी सीमा पर तैनात हैं। मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश की सीमा म्यांमार से लगती है। अरुणाचल प्रदेश की 520 किलोमीटर,

 नागालैंड की 215 किलोमीटर, मणिपुर की 398 किलोमीटर और मिजोरम की 510 किलोमीटर सीमा म्यांमार से लगती है। असम की सीमा बांग्लादेश से लगती है। भारत-बांग्लादेश सीमा पर सीमा सुरक्षा बल के जवान तैनात रहते हैं। उधर मणिपुर की भाजपा सरकार ने रोहिंग्या मुस्लिमों के राज्य में घुसपैठ की आशंका के चलते रेल अलर्ट जारी किया है। मणिपुर पुलिस ने सर्च ऑपरेशन बढ़ा दिए हैं।


तेंगनाउपाल के पुलिस अधीक्षक इबोम्चा सिंह ने कहा, हमारी टीमें अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के चेक गेट वन और दो अलर्ट पर है। अभी तक कोई भी शरणार्थी सीमा पार  से नहीं आया है। रोहिंग्या मुस्लिमों के घुसपैठ की आशंका के चलते वे पहाड़ी जिले हाई अलर्ट पर है जिनकी सीमा म्यांमार से लगती है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि म्यांमार के कमर्शियल टाउन तामु से मोरेह में बिना वैध दस्तावेजों के ट्रेवलिंग करने वाले संदिग्ध लोगों की तलाश में है। वैध दस्तावेजों के साथ तामु से लोग मोरेह आ सकते हैं लेकिन उन्हें शाम 4 बजे तक वापस लौटना होता है। पुलिस ने बताया कि मुख्यमंत्री एन.बीरेन सिंह ने रोहिंग्या मुस्लिमों की घुसपैठ को रोकने के लिए 364 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमार सीमा पर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अलर्ट जारी किया था।


मुख्यमंत्री ने संबंधित पुलिस अधीक्षकों और डिप्टी कमिश्नरों को रोहिंग्या मुस्लिमों के मणिपुर में घुसपैठ की कोशिशों को रोकने के लिए निर्देश दिया था। रोहिंग्या मुस्लिमों की घुसपैठ की आशंका के चलते सिविल सोसायटी संगठनों ने भी सीमा पर निगरानी कड़ी कर दी है। इंफाल की जेल में म्यांमार के 22 ऐसे कैदी हैं जिनकी सजा पूरी हो गई है। इसके बावजूद वे जेल में सड़ रहे हैं। इनमें रोहिंग्या मुस्लिम भी शामिल है। इंफाल ईस्ट की साजिवा केन्द्रीय जेल में म्यांमार के 22 कैदी हैं। इनमें से 10 रोहिंग्या मुस्लिम हैं, जो राखिने स्टेट के रहने वाले हैं। म्यांमार की सरकार ने इन्हें वापस लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद से वे कारावास में पड़े हुए हैं। इनमें से 9 2012 से जेल में हैं जबकि एक 2014 से।


मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने कहा, म्यांमार के कैदियों जिनकी जेल की सजा पूरी हो चुकी है, को वापस उनके देश भेजने के संबंध में हम केन्द्र सरकार खासतौर पर विदेश मंत्रालय से कंसल्ट करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विदेश मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक कार्रवाई करेगी। बीरेन सिंह ने दावा किया है कि इस साल राज्य में एक भी रोहिंग्या मुस्लिम गिरफ्तार नहीं हुआ है। गृह मंत्रालय रोहिंग्या मुस्लिमों को देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए खतरा बता चुकी है इसलिए राज्य सरकार कोई चांस नहीं लेना चाहती।