दाऊद को क्या पकड़कर लाएंगे, जब 88 लोगों का हत्यारा अब तक पकड़ा नहीं गया

Daily news network Posted: 2017-12-04 11:43:37 IST Updated: 2017-12-04 11:43:37 IST
दाऊद को क्या पकड़कर लाएंगे, जब 88 लोगों का हत्यारा अब तक पकड़ा नहीं गया

गुवाहाटी।

देश की मायानगरी मुंबई को सिलसिलेवार धमाकों से दहलाने वाला अंडरवर्ल्र्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को लेकर भारत के हाथ अभी भी खाली हैं। दाऊद आज भी भारत की पकड़ की कोसों दूर है। कुछ ऐसा ही हाल असम में हुए सीरियल ब्लास्ट मामले में भी हैं। यहां भी 13 जगहों पर एक के बाद एक धमाके कर 88 लोगों की जान लेने वाला मुख्य अभियुक्त रंजन देईमारी (एनडीएफबी) आज भी खुला घूम रहा है। जबकि 2014 में मोदी सरकार ने दावा किया था कि वो दाऊद को पकड़कर भारत ले आएंगे। ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि भारत में ही 88 लोगों का हत्यारा खुला घूम रहा है तो विदेश में छुपे दाऊद को आखिर मोदी सरकार कैसे पकड़ सकेगी।


बता दें कि 30 अक्टूबर 2008 को 13 जगहों पर एक के बाद एक हुए धमाकों में 88 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। इन धमाकों में 200 से भी ज्यादा लोग घायल हुए थे। हालांकि अब ये मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। दरअसल फास्ट ट्रेक कोर्ट में सोमवार से इस पर ट्रायल शुरु हुआ है। सीबीआई ने इस सीरियल ब्लास्ट में मुख्य अभियुक्त रंजन देईमारी (एनडीएफबी) सहित 22 को अभियुक्त बनाया है। बता दें राज्य सरकार ने गुवाहाटी हाईकोर्ट की उस सिफारिश को मंजूरी दे दी थी, जिसमें तेजी से ट्रायल से स्पेशल कोर्ट गठित करने की बात कही गई थी।



जानिए, 30 अक्टूबर 2008 के उस काले दिन की हर बात...

30 अक्टूबर 2008 के दिन पूरे देश की तरह असम भी दीपावली की खुशियों में डूबा हुआ था। उस वक्त 5 शहरों की 13 जगहों पर एक के बाद एक हुए धमाकों में 88 लोगों नें अपनी जान गंवा दी थी और 200 लोग से ज्यादा लोग घायल हो गए। सुबह के 11 बज रहे थे गुवाहाटी के गणेशपुरी इलाके के सब्जी बाजार और फल बाजार में हर रोज की तरह लोगों की चहल पहल थी, लेकिन तभी अचानक दो जोरदार धमाके के होते हैं और उस जगह सिर्फ  खून, आग और धुएं का गुबार छा जाता है।



कोकराझाड़ में बाजार का दिन था और भइया दूज को लेकर काफी भीड़ भाड़ थी, क्योंकि दीपावली को लेकर दो दिन की बंदी के बाद बाजार खुला था, लेकिन एक धमाका और पल भर में ही इलाके में मातम का माहौल छा गया। धमाके का सिलसिला यहीं नहीं रुकता गुवाहाटी में ही पांच जगह ब्लास्ट होने के बाद कोकराझाड़ में 3,  बोंगाई गांव में 3 और बारपेटा में 2 जगहों पर कुल मिलाकार 13 धमाके हुए।  इन धमाकों के बाद राज्य सरकार ने सभी टेलीफोन और मोबाइल नेटवर्क को जाम कर दिया था। असम की सीमा सील कर दी गई। असम बांग्लादेश सीमा को भी सील कर दिया गया। साथ ही पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में भी हाई अलर्ट जारी कर दिया गया था।



एनडीएफबी रंजन गुट द्वारा अंजाम दिए गए इन विस्फोटों की याद आज भी असमवासियों के जहन में ताजा है। आज भी पीडि़त परिवार अपने परिजनों को खोने के गम से नहीं उबर पाए है। इस भयंकर घटना को 9 साल बीत चुके है। आज भी पीडि़त परिवार सरकारी सहायता से वंचित है। लोग आज भी न्याय की गुहार लगा रहे है। वहीं धमाकों के शिकार कई लोगों का अभी भी सही पुनर्विस्थापन नहीं हो पाया है।




डॉली बर्मन, जिनका चेहरा गणेशगुरी ब्लास्ट के दौरान जलने के कारण विकृत हो गया था, ने कहा, उन्हें अभी तक राज्य सरकार से कोई मदद नहीं मिली है। बकौल डॉली, मैंने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया, यहां तक की मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से भी मिल चुकी हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। डॉली बर्मन रुपनगर से बीए थर्ड सेमेस्टर की छात्रा है।




डॉली ने कहा कि मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल गई लोग जिस तरह से मुझे घूरते हैं उस कारण मैंने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया है। बकौल डॉली, मेरा भविष्य अनिश्चित है। अगर मुझे सरकारी नौकरी मिल जाती है तो यह मेरे लिए बड़ी मदद होगी। सुनीता शर्मा, जिन्होंने गणेशगुरी ब्लास्ट में अपने पति और चार साल की बेटी को खोया था, ने कहा, उन्हें रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए घरेलू नौकरानी के रूप में काम करना पड़ा। सुनीता भी सरकारी नौकरी चाहती है। गण्ेाशगुरी ब्लास्ट में हितेश कलिता के भाई की मौत हो गई थी। कलिता ने कहा कि मुख्य आरोपी रंजन देईमारी (एनडीएफबी नेता) को शांति प्रक्रिया के नाम पर जमानत पर रिहा कर दिया गया और ट्रायल बहुत धीमी गति से चल रहा है, जिससे हमारे दिमाग में संदेह उत्पन्न हो गया है कि हमें कभी न्याय मिलेगा भी या नहीं।