बाक्सा नरसंहार में वन अधिकारी भी दोषी – मानवाधिकार आयोग

Daily news network Posted: 2017-05-19 10:39:50 IST Updated: 2017-05-19 10:39:50 IST
बाक्सा नरसंहार में वन अधिकारी भी दोषी – मानवाधिकार आयोग

गुवाहाटी।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने साल 2014 के बाक्सा नरसंहार मामले में वन विभाग के अधिकारियों को भी शामिल मानते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।  एनडीएफबी (संगबिजित) के हमलों में कुल मिलाकर 39 बेकसूर ग्रामीण मारे गए थे। आयोग ने राज्य सरकार को मृतकों के आश्रितों को पांच पांच लाख रुपए और घायलों को एक एक लाख रुपए का मुआवजा देने का सरकार को निर्देश दिया है।



लगभग तीन साल पहले हुए उस सामूहिक नरसंहार मामले में शुरुआत से ही मानस राष्ट्रीय पार्क में तैनात कुछ वन अधिकारियों पर उग्रवादियों को हमले में मदद करने के आरोप लगे थे। गोबर्धन थाने के नरसिंगबाड़ी गांव में घटी उक्सत घटना की जांच एनआईए कर रही थी। तीन लोगों को मौके पर ही मौत हो गई थी, वहीं काफी संख्या में ग्रामीण घायल हुए थे। जांच के बाद एनआईए ने अपने आरोप पत्र में उग्रवादी संगठन के बिकुनाश नर्जारी उर्फ एन बिलैंगबालई उर्फ लेग्रा और एस बसुमतारी नामक दो कट्टर नेताओं के नाम शामिल किए थे।



यहां मामले की जानकारी पूछे जाने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के उप पंजीयन (नोडल अफसर) ने वन अधिकारियों के नाम का खुलासा तो नहीं किया, लेकिन कहा कि जांच में साफ हो गया है कि उक्त नरसंहार में राज्य के कतिपय वन अधिकारी भी शामिल थे। जांच में दोषी मिले सभी के खिलाफ आरोप पत्र दिया गया है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार को कुल 36 लोगों के सामूहिक नरसंहार की प्रारंभिक जानकारी थी। हालांकि राज्य सरकार की तरफ से यह संख्या 39 बताई गई थी। इसलिए आयोग के कहने पर कुछ दिन पहले 39 मृतकों के आश्रितों को पांच पांच लाख रुपए और घायलों को एक एक लाख रुपए दिए गए हैं।