किसी रोमांच से कम नहीं है यहां की सैर

Daily news network Posted: 2017-10-11 21:03:48 IST Updated: 2017-10-11 21:03:48 IST
किसी रोमांच से कम नहीं है यहां की सैर
  • भाखड़ा नांगल परियोजना पंजाब में सतलुज नदी पर स्थित भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना है। यह राजस्थान, पंजाब और हरियाणा की संयुक्त परियोजना है।

भाखड़ा नांगल परियोजना पंजाब में सतलुज नदी पर स्थित भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना है। यह राजस्थान, पंजाब और हरियाणा की संयुक्त परियोजना है। इसमें राजस्थान की हिस्सेदारी 15.2 प्रतिशत है। यहां पर आकर इस परियोजना को पास से देखना किसी रोमांच से कम नहीं है। ऊंचाई से गिरते हुए पानी को निहारना किसी रोमांच से कम नहीं है। साथ ही यह देश की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना है इसलिए यहां एक बार आना तो बनाता है।

भाखड़ा नांगल परियोजना को 1963 में देश को समर्पित किया गया था। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में सतलुज नदी पर बना भाखड़ा नागल बांध देश का सबसे लंबा बांध है। यह टिहरी बांध के बाद देश का दूसरा सबसे ऊंचा और दुनिया का तीसरा सबसे ऊंचा बांध है। इससे बड़ा बोल्डर बांध अमेरिका में है।

भाखड़ा नांगल बांध का निर्माण 1948 में शुरू हुआ और अमेरिकी बांध निर्माता हार्वे स्लोकेम के निर्देशन में 1962 में इसका निर्माण पूरा हुआ। 22 अक्टूबर 1963 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इसका शुभारम्भ किया था। इसका मुख्य उद्देश्य सिंचाई और बिजली उत्पादन है। इस बांध पर लगे पनबिजली संयंत्र से  1325 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होता है जिससे पंजाब के अलावा हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में बिजली की आपूर्ति होती है।

इस परियोजना के उद्घाटन के समय पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा था ‘भाखड़ा नांगल परियोजना में कुछ आश्‍चर्यजनक है, कुछ विस्‍मयकारी है, कुछ ऐसा है जिसे देखकर आपके दिल में हिलोरें उठती हैं। भाखड़ा पुनरूत्थित भारत का नवीन मन्दिर है और यह भारत की प्रगति का प्रतीक है।’

शिवालिक पहाड़ियो के बीच बना भाखड़ा बांध 740 फीट ऊंचा और 1700 फीट लंबा है। आधार में इसकी चौड़ाई 625 और ऊपर 30 फीट है। वहीं इससे 13 किलोमीटर दूर नीचे स्थित नागल बांध 95 फीट ऊंचा और 1000 फीट लंबा है।

यह राजस्थान, पंजाब और हरियाणा की संयुक्त परियोजना है। इसमें राजस्थान की हिस्सेदारी 15.2 प्रतिशत है। इस परियोजना से श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, सीकर, झुंझनू और चुरू जिलों के अलावा 250 से अधिक छोटे बड़े गांव और कस्बों को बिजली प्राप्त होती है।