त्रिपुरा में बीजेपी और कांग्रेस खेल रही है ब्लेम गेम!

Daily news network Posted: 2018-02-14 19:18:34 IST Updated: 2018-02-14 20:00:39 IST
त्रिपुरा में बीजेपी और कांग्रेस खेल रही है ब्लेम गेम!
  • त्रिपुरा में चुनाव सर पर हैं और बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे को मात देने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहे हैं यहीं कारण है कि

नई दिल्ली

त्रिपुरा में चुनाव सर पर हैं और बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे को मात देने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहे हैं यहीं कारण है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस पर गैर वाम मतदाताओं को बांटकर सत्ताधारी वाम दल की मदद करने का आरोप लगाया है।



त्रिपुरा में रैली को सम्बोधित करते हुए शाह ने असम और मणिपुर की तरफ इशारा करते हुए कहा, 'कांग्रेस गैर वाम मतों को बांटकर वाम मोर्चे की मदद कर रही है लेकिन सत्ता में बीजेपी ही आएगी।' इन राज्यों में पार्टी का बेस छोटा था फिर भी उसने यहां अपनी सरकारें बनाईं।


शाह के इस तंज पर AICC के जनरल सेक्रेटरी और पुडुचेरी के चीफ मिनिस्टर वी नारायणसामी ने शाह के कमेंट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि त्रिपुरा में दो साल पहले बीजेपी का नामोनिशान नहीं था। यह कांग्रेस ही है जो केरल और त्रिपुरा में कम्युनिस्टों से लड़ती रही है।



बीजेपी को इस बात पूरा भरोसा है कि वह त्रिपुरा में कांग्रेस के परंपरागत वोटर्स को अपनी तरफ खींच लेगी। अगर ऐसा होता है तो वह सत्ताधारी वाम मोर्चे के खिलाफ त्रिपुरा की राजनीति की दिशा अपनी तरफ पलट देगी। त्रिपुरा में कांग्रेस परंपरागत रूप से 10 सीटों पर जीत हासिल करती रही है।



2013 में त्रिपुरा कांग्रेस 2008 के 10 सीटों पर अटके रहने में कामयाब रही थी लेकिन 2016 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी के वाम मोर्चे के साथ गठजोड़ करने के चलते विधायकों और ग्रासरूट वर्कर्स का स्टेट यूनिट से पलायन होने लगा। त्रिपुरा में कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन चुनाव से पहले पांच अन्य नेताओं के साथ बीजेपी में शामिल हो गए।



उधर बर्मन ने कहा, 'लोग इस बार वाम विरोधी वोट को बंटने नहीं देंगे और बीजेपी के पक्ष में मतदान करेंगे। यहां कांग्रेस का नामोनिशान मिट गया है। त्रिपुरा में वाम विरोधी मतदाता हमेशा रहे हैं।' बीते रविवार को केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने त्रिपुरा में कहा था कि राज्य में वाम विरोधियों की जगह को बीजेपी ने अपने कब्जे में कर लिया है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक बीजेपी पूरी तरह वाम विरोधी मतदाताओं पर निर्भर करेगी।