असम में अपनी ही सरकार की सहयोगी पार्टी पर दबाव बना रही है भाजपा!

Daily news network Posted: 2017-06-16 18:58:21 IST Updated: 2017-06-16 18:58:21 IST
असम में अपनी ही सरकार की सहयोगी पार्टी पर दबाव बना रही है भाजपा!
  • असम में एक साल पहले कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने वाली भाजपा ने सहयोगी दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। उसी भाजपा ने अब छोटे सहयोगी दलों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है।

गुवाहाटी। असम में एक साल पहले कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने वाली भाजपा ने सहयोगी दलों के साथ मिलकर  सरकार बनाई थी। उसी भाजपा ने अब छोटे सहयोगी दलों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। उसे 60 सीटें मिली थी। सहयोगी दल बोडो पीपुल्स फ्रंट(बीपीएफ) को 12 और असोम गण परिषद(एजीपी)को 14 सीटें मिली थी। इन दलों के सहयोग के बिना शायद भाजपा में सत्ता में नहीं आ पाती और सर्वानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री नहीं बन पाते। अब उन्हीं सोनोवाल ने(जो सहयोगी दलों का पूरी आदर करते हैं) ने अब बीपीएफ की अनुचित मांगों पर सख्त रूख अपना लिया है। बीपीएफ ग्रेटर ऑटोनोमी की मांग कर रही है।


जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी सरकार के तीन साल के पूरे होने के मौके पर असम आए थे तब गठबंधन के सदस्यों ने एकजुटता से पीएम मोदी को बधाई दी थी। उस वक्त सब कुछ ठीक लग रहा था। जब प्रधानमंत्री दौरा पूरा कर दिल्ली चले गए तो भाजपा और बीपीएफ के बीच आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गए। बीपीएफ के असम सरकार में दो मंत्री हैं। बीपीएफ को लगता है कि उसकी अनदेखी की जा रही है और सोनोवाल के जरिए हो रही भाजपा की मांग से असहज है। भाजपा की मांग है कि बीपीएफ बोडोलैंड टेरिटरियल एरिया डिस्ट्रिक्ट में पार्टी को पैर जमाने में मदद करे। यह इलाका बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल(बीटीसी) के क्षेत्राधिकार में आता है। इसका गठन संविधान की छठी अनुसूची के तहत किया गया है। बीटीएडी में चार जिले आते हैं। ये हैं कोकराझार, बक्सा, उदालगुड़ी और चिरांग। इन जिलों का निर्माण असम के मौजूदा सात जिलों, कोकराझार, बोंगईगांव, नलबाड़ी,बारपेटा,कामरुप,सोनितपुर और दरांग से किया गया था। हग्रामा मोहिलारी उर्फ हग्रामा बासुमातरी बीटीसी के मुख्य कार्यकारी सदस्य हैं। 


इससे पहले वे बीएलटीएफ के प्रमुख थे। फरवरी 2003 में बीटीसी का गठन हुआ था। मेमोरेंडम ऑफ सैटलमेंट पर भारत सरकार के हस्ताक्षर के बाद बीटीसी का अफोर्सेड के रूप में गठन हुआ था। मोहिलारी बीटीसी के निर्वाचित प्रमुख थे। बीटीसी में 12 कार्यकारी सदस्य हैं। इस वक्त वह बीटीसी के प्रमुख और बीपीएफ के चेयरपर्सन हैं। मोहिलारी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री जबरन बोडो प्रभुत्व वाले इलाकों में भाजपा की मौजूदगी दर्ज कराना चाहते हैं। पार्टी ने रणनीति के तहत लोकसभा चुनाव में बीटीएडी डोमिनेटेड जिलों में अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया था ताकि यह साबित कर सके कि भाजपा के पास दावा करने की ताकत है। अन्य स्वायत्त बॉडी बीटीसी एक टेरिटोरियल काउंसिल है,जिसकी असम में स्थापना हुई थी। 2003 में बोडो लिबरेशन टाइगर्स फोर्स(बीएलटीएफ) के काडर्स के सरेंडर के बाद यह अस्तित्व में आई थी। 


बीएलटीएफ के सदस्यों ने मोहिलारी के नेतृत्व में 2003 में हथियार डाल दिए थे। इसके बाद मोहिलारी ने चीफ एग्जिक्यूटिव मेंबर के रूप में शपथ ली थी। बीटीसी के 46 कार्यकारी सदस्य हैं। प्रत्येक सदस्य अपने नियंत्रण वाले इलाके (सोमिस्थि)को देखता है। अपने राजनीतिक लाभ के लिए भाजपा ट्राइबल ग्रुप्स के बीच खुद को स्थापित करने को लेकर अडिग है। भाजपा के नेतृत्व ने मुख्यमंत्री को यह सुनिश्चि करने का टास्क दिया है कि बोडोज में भाजपा के ओरिएंटेशन वाले नेता होने चाहिए जो फैसलों को प्रभावित कर सके। मोहिलारी ने आरोप लगाया है कि बोडो डोमिनेटेड इलाकों में भाजपा का काडर किसानों से पैसा मांग रहा है। भाजपा का काडर किसानों से यह वादा कर पैसा मांग रहा है कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर दिलाएंगे लेकिन मोलिहारी का ये आरोप निराधार है और भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने भी इस आरोप को गलत पाया क्योंकि बीटीएडी में भाजपा का एक भी सदस्य नहीं है। अत: वे उस बॉडी में पैसा मांग ही नहीं सकते जहां उनकी कोई मौजूदगी नहीं है।