हमारे सेना प्रमुख ने की चीन की बोलती बंद,जानिए कैसे

Daily news network Posted: 2018-01-10 11:35:43 IST Updated: 2018-01-10 11:35:43 IST
हमारे सेना प्रमुख ने की चीन की बोलती बंद,जानिए कैसे
  • डोकलाम में चीनी सैनिकों की संख्या में आई कमी के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के बयान पर चीन ने चुप्पी साध ली है।

बीजिंग/नई दिल्ली।

डोकलाम में चीनी सैनिकों की संख्या में आई कमी के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के बयान पर चीन ने चुप्पी साध ली है। हालांकि चीन ने मंगलवार को यह जरूर कहा कि डोकलाम में तैनात उसके सैनिक संप्रभुता संबंधी अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। दरअसल एक दिन पहले भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि डोकलाम में चीनी सैनिकों की संख्या में काफी कमी आई है। दरअसल सिक्किम सेक्टर स्थित डोकलाम क्षेत्र को लेकर पिछले साल भारत और चीन के बीच 73 दिनों तक गतिरोध बरकरार रहा था। आखिरकार 28 अगस्त को दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनातनी खत्म हुई।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग से जब जनरल रावत के बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, डोकलाम का इलाका हमेशा से चीन का हिस्सा और चीन के लगातार एवं प्रभावी अधिकार क्षेत्र में रहा है। इस संबंध में कोई विवाद नहीं है। सेना प्रमुख ने सोमवार को बताया था कि भारतीय और चीनी सैनिकों ने अरुणाचल प्रदेश के तूतिंग में भारतीय हिस्से में चीन की टीमों द्वारा सड़क बनाने की कोशिश का हालिया मुद्दा सुलझा लिया है। उस समय थलसेना प्रमुख ने कहा था कि डोकलाम में चीनी सैनिकों की संख्या में काफी कमी आई है। सैनिकों की संख्या में कमी पर टिप्पणी करते हुए लू कांग ने कहा, डोकलाम इलाके में तैनात और वहां गश्त कर रहे चीनी सैनिक ऐतिहासिक परंपराओं के अनुसार संप्रभुता संबंधी अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं और क्षेत्रीय संप्रभुता को बरकरार रख रहे हैं।

लू ने जनरल रावत की इस टिप्पणी पर प्रत्यक्ष तौर पर कुछ नहीं कहा कि दोनों देशों ने अरुणाचल प्रदेश के तूतिंग में भारतीय क्षेत्र में सड़क बनाने की चीनी सैनिकों की योजना से जुड़ा मसला दिसंबर के आखिरी हफ्ते में सुलझा लिया। गौरतलब है कि चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है जबकि भारत इसे सिरे से खारिज करता आ रहा है। लू ने कहा,मेरी सहयोगी इससे जुड़े सवाल पर कई बार प्रतिक्रिया जाहिर कर चुके है। मुझे दोहराना होगा कि चीन भारत सीमा के पूर्वी हिस्से में भारी विवाद है।

लिहाजा हमें आम राय के जरिए समझौते पर पहुंचना होगा लेकिन इससे पहले हमें शांति व सुरक्षा बरकरार रखने की जरूरत है। हम पहले ही स्थापित किए जा चुके तंत्र और सीमा संबंधी ऐतिहासिक समझौतों के जरिए संबंधित विवाद सुलझा सकते हैं। बता दें कि चीन डोकलाम को भी अपना हिस्सा बताता रहा है जबकि भूटान इसे अपना क्षेत्र मानता है। इसी क्षेत्र में चीन के सैनिकों की सड़क बनाने की कोशिशों को भारतीय सैनिकों ने नाकाम कर दिया था।