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नाहिद आफरीन का प्रोग्राम नहीं होने के विरोध अड़े हैं असम के मौलाना!

Patrika news network Posted: 2017-03-17 15:51:10 IST Updated: 2017-03-17 15:51:10 IST
नाहिद आफरीन का प्रोग्राम नहीं होने के विरोध अड़े हैं असम के मौलाना!
  • असम के कुछ मौलानाओं ने 25 मार्च के म्यूजिकल इवेंट के खिलाफ की गई अपील को वापस लेने से इनकार कर दिया है। इस म्यूजिकल इवेंट में नाहिद आफरीन परफॉर्म करने वाली है।

गुवाहाटी।

असम के कुछ मौलानाओं ने 25 मार्च के म्यूजिकल इवेंट के खिलाफ की गई अपील को वापस लेने से इनकार कर दिया है। इस म्यूजिकल इवेंट में नाहिद आफरीन परफॉर्म करने वाली है। तीन दिन पहले यह खबर आई थी कि असम के 46 मौलानाओं ने नाहिद के खिलाफ फतवा जारी किया है। इसके लेकर देश भर में बवाल मच गया। आम लोगों के साथ साथ फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और राजनेताओं ने नाहिद का साथ दिया। हालांकि बाद में फतवे की खबर झूठी साबित हुई।

जमीयत उलेमा की राज्य ईकाई के महासचिव मौलाना अब्दुर राशिद कासिमी और अन्य सात मौलानाओं की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि हमारा इरादा नाहिद या किसी का विरोध करना नहीं है।  अपील जारी करने के पीछे मुख्य मकसद धार्मिक स्थानों की पवित्रता को बनाए रखना है। अगर आर्टिस्ट समुदाय आहत हुआ है तो इसके लिए हमें खेद है। यह गैर इरादतन और असावधानीवश हुआ है। जिस म्यूजिकल इवेंट का विरोध किया जा रहा है वह उदाली सोनाई बीबी कॉलेज के परिसर में होना है,यह असम के होजाई जिले के लंका के पास स्थित है।

कासिमी उन 46 लोगों में शामिल है जिन्होंने अपील की थी। एक अंग्रेजी समाचार पत्र से टेलीफोन पर बातचीत में कासिमी ने कहा,उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है। अत: अपील वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता। जो कुरान के उसूलों के खिलाफ जाता हो उससे हम समझौता नहीं कर सकते। हमने न तो कोई फतवा जारी किया है और न किसी को धमकी दी है। हमारी सिर्फ आयोजकों से विनम्र अपील है कि वे म्यूजिकल शो ना करें क्योंकि वैन्यू मस्जिदों,मदरसों,और अन्य धार्मिक संस्थानों से घिरा हुआ है।

वैन्यू पर इस तरह का शो करने से माहौल खराब होगा। हमारी अपील न किसी के खिलाफ है और न ही इसके पीछे कोई राजनीतिक मकसद है। मीडिया के एक वर्ग ने हमारी अपील को गलत रूप में बताया। उन्होंने इसे फतवा करार दे दिया। प्रेस रिलीज में प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि वह यह सुनिश्चि करे कि निहित स्वार्थ उनकी अपील को लेकर गलत जानकारी फैलाकर साम्प्रदायिक माहौल खराब न कर पाएं। प्रेस रिलीज पर जिन अन्य 7 लोगों के साइन है उन सभी के  नाम उस पत्रक(अपील)पर थे जिसमें 46 मौलानाओं के नाम हैं।

होजई में पिछले कुछ दिनों से पत्रक बांटे गए हैं जिनमें दावा किया गया है कि इस तरह के प्रोग्राम आयोजित करना शरीयत के खिलाफ है। पत्रक में आफरीन का नाम नहीं है। पत्रक में कहा गया है कि मस्जिदों, कब्रगाहों और अन्य धार्मिक स्थलों के पास स्थित जगह पर म्यूजिकल इवेंट की अनुमति देने से आने वाली पीढ़ी को अल्लाह का प्रकोप झेलना पड़ेगा। पत्रक में 46 मौलानाओं के नाम है लेकिन विवाद उस वक्त खड़ा हुआ जब उनमें से कुछ ने दावा किया कि उनके नाम छापने से पहले अनुमति नहीं ली गई। मौलाना शमसुद्दीन मुहाद्दीस ने कहा, मेरा अपील से कोई लेना देना नहीं है। उन्हें जो करना हैं करें। कल दो लोग जानना चाहते थे कि क्या इस्लाम गाने और डांस की इजाजत देता है,मैंने कहा,नहीं। इसके अलावा मैं कुछ नहीं जानता। इसके बाद मुझे पता चला कि पत्र पर छपे नामों में मेरा भी नाम शामिल है।