मारुति के मानेसर प्लांट में हिंसा का केस,31 दोषी करार, 117 बरी

Daily news network Posted: 2017-03-10 15:12:57 IST Updated: 2017-03-10 15:12:57 IST
मारुति के मानेसर प्लांट में हिंसा का केस,31 दोषी करार, 117 बरी
  • 2012 में मारुति सुजुकी के मानेसर प्लांट में हुई हिंसा के मामले में गुडग़ांव की अदालत ने फैसला सुनाया है।

नई दिल्ली।

2012 में मारुति सुजुकी के मानेसर प्लांट में हुई हिंसा के मामले में गुडग़ांव की अदालत ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 31 लोगों को दोषी करार दिया जबकि 117 को आरोपों से बरी कर दिया। दोषियों को होली के बाद सजा सुनाई जाएगी।

फैसले के बाद जहां मारुति के गुडग़ांव व मानेसर प्लांट में गुरुवार को कर्मचारियों ने लंच नहीं किया वहीं सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन को पूरी तरह से अलर्ट कर दिया गया,इसके अलावा जिले में धारा 144 लगा दी गई। बचाव एवं अभियोजन पक्ष की दलीलों सुनने के बाद एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज आरपी गोयल की अदालत ने 10 मार्च तक के लिए फैसला सुरक्षित रखा था। 18 जुलाई 2012 को मारुति सुजुकी के मानेसर प्लांट में हड़ताल के दौरान हुई हिंसा में प्रबंधन के 98 लोग घायल हुए थे जबकि जनरल मैनेजर अवनीश देव की जिंदा जल जाने से मौत हो गई थी।

प्लांट का अधिकतर हिस्सा जलकर खाक हो गया था और परिसर में जमकर तोडफ़ोड़ हुई थी। घटना के बाद प्लांट में 525 श्रमिकों की नौकरी चली गई थी। मामले में 148 लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था,जिसमें से 139 को जमानत पर रिहा किया गया था। 148 आरोपियों में से 90 का नाम एफआईआर में नहीं था। 546 बर्खास्त कर्मचारियों को काम पर वापस लेने और मारुति कांड की उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई। पुलिस ने अदालत में 400 पन्नों की चार्जशीट पेश की। केस में 182 गवाह बनाए गए थे,जिनमें 30 डॉक्टर,40 से ज्यादा पुलिसकर्मी और प्रबंधन के 70 कर्मचारी थे।

बचाव पक्ष के वकील ने यह साबित करने की कोशिश की थी कि बिल्डिंग में आग मजदूरों ने नहीं बल्कि किसी और ने लगाई थी। उनके मुताबिक अगर मजदूरों ने आग लगाई होती तो माचिस भी जल जाती। स्पष्ट है कि मजदूरों के खिलाफ हत्या का केस चले,इसके लिए माचिस लाकर बाद में रख दी गई। मजदूरों के खिलाफ मारपीट का मामला बनता है,हत्या का नहीं। बचाव पक्ष के ही एक अन्य वकील ने कहा कि प्रबंधन के जिस आदमी ने एक मजदूर पर आग लगाने का आरोप लगाया था वह उसे पहचान नहीं सका।