त्रिपुरा: पनिसागर सीट पर कभी नहीं हारी है सीपीएम, क्या भाजपा दे पाएगी टक्कर

Daily news network Posted: 2018-02-13 15:41:54 IST Updated: 2018-02-13 19:45:42 IST
त्रिपुरा: पनिसागर सीट पर कभी नहीं हारी है सीपीएम, क्या भाजपा दे पाएगी टक्कर
  • त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पनिसागर सीट पर इस बार दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।

अगरतला।

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पनिसागर सीट पर इस बार दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है। दरअसल ये सीट सीपीएम का दबदबा रहा है। अगर बात पिछले 9 विधानसभा चुनावों की जाए तो यहां से सीपीएम के ही उम्मीदवार जीतते आए हैं। इस दौरान सीपीएम के सुबोध दास का जिक्र करना बेहद जरूरी है, क्योंकि उन्होंने लगातार छह बार इस सीट पर अपना कब्जा जमाया है, लेकिन इस बार दिलचस्प मुकाबले के आसार इसलिए लग रहे हैं, क्योंकि सीपीएम ने 2018 के चुनाव में अजीत कुमार दास को टिकट दिया। वहीं ओपीनियन पोल में बाजी मार रही बीजेपी ने यहां से बिनय भूषण दास को उनके खिलाफ खड़ा किया। कांग्रेस ने भी इस सीट से नए चेहरे गौरांग दास तालुकदार को मैदान में उतारा है।

सबसे मालदार हैं बीजेपी के उम्मीदवार बिनय भूषण दास

इस सीट पांच पार्टियों ने अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। एएमबी पार्टी के बिनोद नाथ और एआईटीसी के रानी सिंह भी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। इस पांचों उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा पढ़े लिखे और रईस बीजेपी के बिनय भूषण दास हैं। दास ग्रेजुएट प्रोफेशनल हैं और उनकी संपत्ती साठ लाख रुपए से भी ज्यादा है। वहीं कांग्रेसी उम्मीदवार गौरांग दास तालुकदार भी ग्रेजुएट हैं। इसके बाद नंबर आता है सीपीएम उम्मीदवार अजीत का जिन्होंने दसवीं पास की है। वहीं अन्य दो उम्मीदवार बिनोद नाथ और रानी सिंह महज आठवीं पास ही हैं। इन उम्मीदवारों की संपत्ति की बात की जाए तो अजीत कुमार के पास 16,85,531 रुपए, बिनोथ नाथ के पास 13,65,779 रुपए, गौरांग के पास 3,21,366 रुपए और रानी सिंह के पास 7,03,430 रुपए हैं।  खास बात यह है कि इन पांचों उम्मीदवारों में से किसी पर भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।

लगातार नौ बार से सीपीएम का दबदबा

इस विधानसभा में हुए बीते नौ चुनावों की बात करें तो यहां से हर बार बाजी सीपीएम के उम्मीदवारों ने ही मारी है। पहले विधानसभा चुनाव में सीपीएम के सुबोध चंद्र दास ने निर्दलीय उम्मीदवार देबेंद्र चंद्र नाथ को रिकॉर्ड 4807 मतों से हराया था। सुबोध को 5588 वोट मिले, जबकि देबेंद्र के खाते में महज 781 वोट आए।  1983 के चुनाव में सीपीएम ने एक बार फिर अपने विनर कैडिंडेट सुबोध को मैदान में उतारा। इस बार उनको टक्कर देने के लिए निर्दलीय उम्मीदवार बिबेकानंद चक्रबोर्ती मैदान में थे। हालांकि सुबोध ने इस बार भी ये चुनाव 3595 वोट से जीत लिया। उनके खाते में 6642 वोट गए, वहीं बिबेकानंद को 3047 वोटों से ही संतोष करना पड़ा। 1988 के चुनाव में सीपीएम ने सुबोध दास को  टिकट दिया। इस दौरान यहां कांग्रेस की भी लहर चल रही थी। कांग्रेस के उम्मीदवार आशुतोष जीत तो नहीं पाए, लेकिन उन्होंने सुबोध को कड़ी टक्कर जरूर दी। सुबोध को 7774 वोट तो आशुतोष को 6491 वोट मिले। इस जीत के बाद सुबोध जनता के दिलों में इस कदर छाए कि उन्हें हराना नामुमकिन हो गया। वे  1988 से लेकर 2013 तक लगातार छह बार इस सीट से विजेता बने।

छह बार के विजेता है सुबोध दास

1993 के चुनाव में सुबोध दास से कांग्रेस के आशुतोष दास को एक बार फिर 1885 वोट से हरा दिया। 1998 में कांग्रेस से उम्मीदवार को बदलकर कालिदास दत्ता को मैदान में उतारा, लेकिन सुबोध के सामने उन्हें भी 1864 वोटों से शिकस्त खानी पड़ी। कमोबेश यही हाल 2003 के चुनावों में भी रहा। इस बार भी सीपीएम के सुबोध ने कांग्रेस के बिकेश शर्मा को 1793 वोटों से हरा दिया। 2008 के चुनाव में कांग्रेस ने फिर अपना उम्मीदवार बदला और सुबोध के सामने राधिका रंजन दास को खड़ा किया, लेकिन 12234 वोट पाने वाले राधिका रंजन को 1708 वोटों से हार झेलनी पड़ी। पिछले विधानसभा चुनाव में भी सुबोध दास का जादू चला और उन्होंने राधिका रंजन को फिर 1911 वोटों से हरा दिया। सुबोध को 15196 तो दास को 13285 वोट ही मिल सके।  बता दें कि त्रिपुरा की 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए 18 फरवरी को वोट डाले जाएंगे। वहीं तीन मार्च को चुनाव परिणामों की घोषणा की जाएगी।