असम में 'फर्जी एनकाउंटर' की रिपोर्ट देने वाले आईपीएस से होगी पूछताछ

Daily news network Posted: 2017-06-20 16:50:46 IST Updated: 2017-06-20 16:50:46 IST
असम में 'फर्जी एनकाउंटर' की रिपोर्ट देने वाले आईपीएस से होगी पूछताछ
  • असम में इस साल मार्च में कथित उग्रवादियों के साथ हुई मुठभेड़ को फर्जी बताने वाले सीआरपीएफ के आईजी रजनीश राय से गृह मंत्रालय पूछताछ कर सकता

नई दिल्ली।

असम में इस साल मार्च में कथित उग्रवादियों के साथ हुई मुठभेड़ को फर्जी बताने वाले सीआरपीएफ के आईजी रजनीश राय से गृह मंत्रालय पूछताछ कर सकता है। सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर जनरल रजनीश राय ने असम के चिरांग जिले में इस साल मार्च में हुई एक मुठभेड़ की जांच रिपोर्ट में मुठभेड़ को फर्जी बताया था।




मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रिपोर्ट में राय द्वारा पेश किए गए तथ्य एवं परिस्थितियों की जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक जरूरत पडऩे पर उनसे पूछताछ भी की जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक अगर फर्जी मुठभेड़ की शिकायत गलत या किसी खास मकसद से की जाने की बात सामने आई तो शिकायतकर्ता के खिलाफ ही मामला दर्ज किया जाएगा।



इस मामले में तथ्यों की जांच के लिये जम्मू और कश्मीर पुलिस के पूर्व डायरेक्टर जनरल अशोक प्रसाद को जल्द ही असम भेजा जा सकता है। फिलहाल गृह मंत्रालय में तकनीकी सलाहकार के रूप में तैनात प्रसाद इस बात की भी जांच करेंगे कि राय ने इस मामले की जांच ठीक से की थी या नहीं। राय ने जांच कर अपनी रिपोर्ट में असम के चिरांग जिले में सुरक्षा बलों के संयुक्त अभियान के दौरान हुई मुठभेड़ को फर्जी बताया था।



बता दें कि मुठभेड़ को फर्जी बताने वाले सीआरपीएफ के आईजी रजनीश राय का तुरंत प्रभाव से नॉर्थ ईस्ट से ट्रांसफर कर दिया गया था। राय ने जिस मुठभेड़ को फर्जी बताया था उसमें दो लोग मारे गए थे। सेना, सीआरपीएफ, एसएसबी और राज्य पुलिस की संयुक्त टीम ने मुठभेड़ में दो संदिग्ध उग्रवादियों को मारा था।


 


राय को आंध्र प्रदेश के चित्तूर में स्थित सीआरपीएफ की काउंटर इंसर्जेंसी और एंटी टेररिज्म स्कूल ज्वाइन करने को कहा गया। राय शिलॉन्ग में बतौर (नॉर्थ ईस्ट सेक्टर)आईजी पोस्टेड थे। राय का ट्रांसफर जिस तरीके से किया गया है उससे कई सवाल खड़े होते हैं। यह घटनाक्रम उस वक्त सामने आया था, जब गृह मंत्रालय ने राय के आरोपों की जांच कराने का फैसला किया था। 24 मई को राय ने सीआरपीएफ के मुख्यालय और अन्य अथॉरिटीज को बताया था कि उन्होंने विवेकपूर्ण जांच की है। 



जांच के दौरान जीपीएस डेटा और मुठभेड़ में शामिल लोगों के साक्षात्कार लिए। इसमें पता चला कि असम के चिरांग जिले के सिमलागुड़ी गांव में 30 मार्च को फर्जी मुठभेड़ में एनडीएफबी(एस) के दो संदिग्ध उग्रवादी मारे गए थे। राय की 17 अप्रेल की रिपोर्ट कहती है कि डी-कलिंग गांव में दो लोगों को उनके घरों से उठाया गया और उनकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। राय ने विस्तृत जांच की मांग करते हुए कहा कि उनके शवों पर हथियार प्लांट किए गए थे। समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक गांव के किसान परिवार का कहना है 29 मार्च की रात जब सेना के जवान उन्हें उठाकर ले गए तब वे सो रहे थे।