मौलाना अरशद मदनी के भड़काऊ बयानों को लेकर मांगी माफी

Daily news network Posted: 2017-11-14 19:41:02 IST Updated: 2017-11-14 19:41:02 IST
मौलाना अरशद मदनी के भड़काऊ बयानों को लेकर मांगी माफी
  • असम के हालात से लोगों को रूबरू कराने के लिए दिल्ली एक्शन कमेटी फॉर असम(डीएसीए) ने 13 नवंबर को दिल्ली में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था।

इंफाल।

असम के हालात से लोगों को रूबरू कराने के लिए दिल्ली एक्शन कमेटी फॉर असम(डीएसीए) ने 13 नवंबर को दिल्ली में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। कार्यक्रम में जमीयत उलेमा ए हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने भड़काऊ बातें कही थी। दिल्ली एक्शन कमेटी फॉर असम की एक सदस्य ए.बासुमातरी ने मदनी के भड़काऊ बयान को लेकर असम के लोगों से माफी मांगी है। बासुमातरी दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। बासुमातरी ने कहा कि उन्होंने मदनी को आमंत्रित नहीं किया था। चूंकि वह पब्लिक मीटिंग थी और कोई भी आ सकता था इसलिए मदनी भी आ गए। उन्होंने अपने धार्मिक व राजनीतिक मकसद के लिए प्लेटफॉर्म को हाईजैक कर लिया। हम मदनी के विचारों का समर्थन नहीं करते।

उल्टा हम उनके विचारों की निंदा करते हैं दो सांप्रदायिक और भड़काऊ थे। दूसरी ओर वरिष्ठ पत्रकार हैदर हुसैन जो सोमवार को हुई मीटिंग में मदनी के साथ मौजूद थे ने, कहा मदनी जो बता रहे थे, वह उन्हें समझ में नहीं आ रही थी। बकौल हुसैन, मदनी ज्यादातर उर्दू में बोल रहे थे, इसलिए मुझे पूरी तरह से समझ में नहीं आया। हालांकि हुसैन ने कहा कि असम के लोगों को मदनी जैसों को नहीं सुनना चाहिए जो शांतिपूर्ण राज्य को सांप्रदायिक लाइन पर विभाजित करना चाहते हैं। वहीं वरिष्ठ पत्रकार मंजीत महंता ने कहा कि दिल्ली एक्शन कमेटी के निमंत्रण पर गोहेन सहित हमारे में से 6 लोग आए थे। जब मदनी सांप्रदायिक व भड़काऊ भाषण दे रहे थे उस वक्त गोहेन ने विरोध किया था। आपको बता दें कि मदनी का विवाद सोमवार से असम के मीडिया में छाया हुआ है। लोगों का एक वर्ग मदनी के साथ मंच साझा करने को लेकर गोहेन और अन्य की आलोचना कर रहा है।

सोमवार को एनआरसी व नागरिकता पर हुई मीटिंग में गोहेन के अलावा महंता, हुसैन, अपूर्बा बरुआ और हाफिज राशिद चौधरी ने भी हिस्सा लिया था। कार्यक्रम में मदनी ने असम में नागरिकता के मसले को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार पर बांग्लादेशी नागरिकों के नाम पर देश में म्यांमार जैसे हालात बनाने की कोशिश का आरोप लगाया था। मदनी ने कहा था, 1971 के पहले के सभी बाशिंदों को भारत का नागरिक माना जाए। सभी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन जब से असम में भाजपा की सरकार आई है तब से इस मसले को धार्मिक रंग देने की कोशिश हो रही है। अपने ही लोगों को बांग्लादेशी बताया जा रहा है।

ये इस मुुल्क में म्यांमार की तरह हालात बनाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि कि वोटिंग रजिस्ट्री से 48 लाख शादीशुदा मुस्लिम महिलाओं के नाम हटाने की कोशिश हो रही है, ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि उनके हक को छीन लिया जाए। उनके बच्चों को शिक्षा प्राप्त न हो सके और उन्हें देश से बाहर फेंक दिया जाए। अगर ऐसा ही चला तो असम में म्यांमार जैसी स्थिति बन जाएगी।