डोकलाम विवाद पर चीन ने कई देशों को राजदूत को बुलाया, भारत को दिखाई आंख

Daily news network Posted: 2017-07-18 12:16:14 IST Updated: 2017-07-18 12:16:14 IST
डोकलाम विवाद पर चीन ने कई देशों को राजदूत को बुलाया, भारत को दिखाई आंख

नई दिल्ली। डोकलाम विवाद के बीच चीन ने एक बार फिर भारत को आंख दिखाने की कोशिश की है। चीन ने भूटान के डोकलाम विवाद पर कई देशों के राजदूतों को बुलाया और कहा कि चीन इस मुद्दे पर न पीछे हटेगा और न ही ज्यादा इंतजार कर सकता है। चीन ने राजधानी बीजिंग में भारत के साथ डोकलाम विवाद पर कई देशों को राजदूतों को बुलाकर ब्रीफ किया।


चीन ने कहा कि वह अपनी स्थिति से पीछे नहीं हटेगा और न ही ज्यादा इंतजार कर सकता है। भारत को ये स्थिति समझनी चाहिए। वहीं, डोकलाम विवाद पर विदेश सचिव संसद की समिति को जानकारी देंगे। बता दें कि डोकलाम में चीन जबरदस्ती सड़क बना रहा है, जिसको लेकर पिछले तीन सप्ताह से भारत चीन के रिश्तों पर तनाव है।


भूटान में जमीन के एक टुकड़े को लेकर भारत और चीन आमन सामने आ गए हैं। चीन की तरफ से जहां बार-बार भारत को 1962 की याद दिलाकर डराने की कोशिश की जा रही है। वहीं भारत इस मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं है। सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत ने चौकसी और बढ़ा दी है।


गृहमंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, भारत चीन सीमा पर अब तक निष्क्रिय पड़ी चौकियों को एक बार सक्रिय कर दिया गया है, यानी उन चौकियों पर जवानों और अधिकारियों की पोस्टिंग कर दी गई है। सूत्रों के मुताबिक भारत-चीन सीमा पर इस तरह की सभी पोस्ट पर आईटीबीपी के जवान और अधिकारियों को तैनात कर दिया गया है। ये सभी सेना के ऑपरेशनल कमांड पर काम करेंगे। भारत की तरफ से ये साफ संकेत दे दिया गया है कि वो चीन की धमकियों से डरने वाला नहीं है।


बता दें कि इससे पहले चीनी सरकार का मुखपत्र कहे जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने धमकी भरे लहजे में लिखा था कि चीन टकराव के लिए तैयार है और डोकलाम के मुद्दे चीन युद्ध के लिए जाने से भी पीछे नहीं हटेगा अगर ऐसा हुआ तो भारत को यह टकराव भुगतना पड़ सकता है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के लेख में भारत को धमकी देते हुए कहा था कि चीन किसी भी तरह के टकराव के लिए तैयार है। साथ ही लेख में लिखा है कि डोकलाम मुद्दे पर चीन युद्ध से भी पीछे नहीं हटेगा और अगर ऐसा होता है तो भारत को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। ग्लोबल टाइम्स के लेख में लिखा है कि भारत को एलएसी पर टकराव का सामना करना पड़ेगा।