ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स के 120 पूर्व उग्रवादी भूख हड़ताल पर

Daily news network Posted: 2017-11-15 12:15:16 IST Updated: 2017-11-15 12:15:16 IST
ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स के 120 पूर्व उग्रवादी भूख हड़ताल पर
  • ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स के करीब 120 पूर्व उग्रवादी मंगलवार से भूख हड़ताल पर चले गए। भूख हड़ताल के जरिए वे अपनी मांगों को पूरी करने के लिए सरकार दबाव बनाना चाहते हैं।

ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स के करीब 120 पूर्व उग्रवादी मंगलवार से भूख हड़ताल पर चले गए। भूख हड़ताल के जरिए वे अपनी मांगों को पूरी करने के लिए सरकार दबाव बनाना चाहते हैं। जो 120 पूर्व उग्रवादी हड़ताल पर गए हैं उन्होंने सरेंडर कर दिया था। ये पूर्व उग्रवादी 2007 से पोस्ट सरेंडर सपोर्ट व रिहेबिलिटेशन को लेकर सरकार से वार्ता कर रहे हैं। प्री-1998 एटीटीएफ रिटर्नीज के महासचिव एस.कुमार ब्रू ने कहा कि सितंबर में सरकार ने उन्हें पशुपालन व अन्य आजीविका सपोर्ट का आश्वासन दिया था। ब्रू ने कहा कि उन्होंने 15 सितंबर को भूख हड़ताल की थी लेकिन ट्राइबल वेलफेयर डिपार्टमेंट व अन्य अधिकारियों ने पशु संसाधन विकास व कृषि विभागों से आजीविका सपोर्ट का आश्वासन देने के बाद अगले ही दिन भूख हड़ताल वापस ले ली गई थी। ब्रू ने कहा, अभी तक कोई सपोर्ट मुहैया नहीं कराया गया है।

जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं हो जाती भूख हड़ताल जारी रहेगी। पूर्व विद्रोही अपने खिलाफ लंबित मामलों को वापस लेने की भी मांग कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर अपहरण व गैर कानूनी गतिविधियों से संबंधित है। 1995 में एटीटीएफ के 214 उग्रवादियों ने सरेंडर किया था। इनमें से 192 अभी भी लंबित रिहेबिलिटेशन सपोर्ट के लिए सरकार के साथ वार्ता में संलग्न है। ब्रू ने कहा कि इनमें से 177 को हाउसिंग सपोर्ट मुहैया कराया गया है। सरकार ने पहले इंदिरा आवास योजना के तहत उन्हें हाउसिंग सपोर्ट दिया था। यह उनके लिए घोषित ब्रॉड पैकेज स्कीम का हिस्सा है। ज्यादातर पूर्व उग्रवादियों को यहां से 50 किलोमीटर दूर गौमती जिले के अमारपुर, ओम्पी और नूतन बाजार पुनर्वासित किया गया था। कुछ को खोवई में पुनर्वासित किया गया था।

एटीटीएफ के सुप्रीम रंजीत देबबर्मा को जिन्हें 2012 में बांग्लादेश में गिरफ्तार किया गया था, को दो दिन पहले देशद्रोह के आरोप में फिर से पश्चिम त्रिपुरा से गिरफ्तार किया गया। रंजीत देबबर्मा 2015 से जमानत पर जेल से बाहर थे। उधर सर्व शिक्षा अभियान के तहत विभिन्न सरकारी स्कूलों में काम कर रहे करीब 5 हजार शिक्षक सोमवार को बेमियादी हड़ताल पर चले गए। शिक्षकों की मांग है कि उन्हें स्थायी किया जाए और राज्य सरकार के शिक्षकों की तरह उनको भी फिक्स वेतन दिया जाए। त्रिपुरा एसएसए टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सजल देब ने कहा, त्रिपुरा में 2001-2002 के दौरान फ्लैगशिप कार्यक्रम लॉन्च किया गया था,तब से केन्द्र की योजना के तहत संविदा पर रखे गए शिक्षकों को राज्य सरकार उनके अधिकारों से वंचित रख रही है।

सरकार हमें स्थायी शिक्षक गिनते हुए नई दिल्ली से फंड्स ला रही है लेकिन हममें से प्रत्येक को जो दिया जाना चाहिए उससे 4 हजार से 5 हजार रुपए कम दिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि एसएसए शिक्षकों के लिए जो फंड जारी किया जाता है उसका इस्तेमाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। देब ने दावा किया कि आंदोलन में 5,145 शिक्षक शामिल हैं। जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं हो जाती तब तक आंदोलन जारी रहे