खत्म हो सकती है मेघालय के 10 विधायकों की विधानसभा सदस्यता

Daily news network Posted: 2017-11-14 11:53:15 IST Updated: 2017-11-14 11:53:15 IST
खत्म हो सकती है मेघालय के 10 विधायकों की विधानसभा सदस्यता
  • मेघालय के 10 विधायकों की विधानसभा सदस्यता खतरे में है। मेघालय हाईकोर्ट ने 9 नवंबर को मेघालय संसदीय सचिव(नियुक्ति, वेतन, भत्ते और अन्य प्रावधानों),एक्ट 2005 को अवैध करार दिया था।

मेघालय के 10 विधायकों की विधानसभा सदस्यता खतरे में है। मेघालय हाईकोर्ट ने 9 नवंबर को मेघालय संसदीय सचिव(नियुक्ति, वेतन, भत्ते और अन्य प्रावधानों),एक्ट 2005 को अवैध करार दिया था। हाईकोर्ट ने यह आदेश 9 नवंबर को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया था। हालांकि हाईकोर्ट ने इन विधायकों की विधानसभा की सदस्यता खत्म करने का फैसला राज्यपाल पर छोड़ दिया था। जनहित याचिका पश्चिम तैंतिया हिल डिस्ट्रिक्ट के निवासी एम.सुमेर ने दाखिल की थी। जनहित याचिका में अधिनियम की वैधता को चुनौती दी गई थी। सुमेर का कहना था कि संसदीय सचिव का पद संभालने वाले विधायकों को अयोग्य करार दिया जाना चाहिए। सुमेर ने सोमवार को राज्यपाल गंगा प्रसाद से राजभवन में मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। इसमें राज्यपाल से उन विधायकों को अयोग्य करार देने का अनुरोध किया गया है जो संसदीय सचिव के पद पर थे।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद सुमेर ने कहा, गर्वनर ने आश्वासन दिया है कि वह हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन करेंगे और संविधान के अनुच्छेद 192 का पालन करेंगे। राज्यपाल गंगा प्रसाद ने सोमवार को कहा कि जिन विधायकों के पास संसदीय सचिव का पद था, उन्हें अयोग्य करार दिया जाना चाहिए या नहीं, इस पर फैसला लेते वक्त वह संविधान का पालन करेंगे। आपको बता दें कि अगर इन विधायकों की विधानसभा सदस्यता खत्म हो जाती है तो मुकुल संगमा के नेतृत्व वाली सरकार अल्पमत में आ जाएगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सभी 10 विधायकों ने ससदीय सचिव के पद से इस्तीफा दे दिया था। अब इन विधायकों का कहना है कि उन्हें विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दिए जाने का कोई आधार नहीं है।

सुमेर की मांग है कि असंवैधानिक पद पर बने रहने के कारण सरकार को इन विधायकों को सभी वेतन और भत्ते लौटाने का निर्देश देना चाहिए क्योंकि वे हाईकोर्ट ने जिस दिन फैसला दिया उस दिन से ही ये अयोग्य करार दिए जाने के योग्य हैं। गौरतलब है कि 26 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने 2004 में असम में लागू किए गए उस कानून को असंवैधानिक करार दिया था जो संसदीय सचिवों की नियुक्ति को राज्य मंत्री की रैंक की अनुमति देता है। विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता में आने के बाद 12 मार्च 2013 को मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने 12 मंत्रियों के सहयोग के लिए 18 विधायकों को संसदीय सचिव की शपथ दिलाई थी।

हालांकि निर्दलीय विधायक लामबोकलांग एम. ने पिछले साल 29 मार्च को कानूनी आधार का उदाहरण देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था। संसदीय सचिव सेलेस्टाइन लिंगदोह और कोमिंगोन वाई. को कैबिनेट मंत्री बना दिया गया था। 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव अगले साल फरवरी-मार्च में प्रस्तावित है।