मणिपुर में भाजपा के पास 30 से ज्यादा विधायक,बीरेन सिंह होंगे मुख्यमंत्री

Daily news network Posted: 2017-03-15 12:02:51 IST Updated: 2017-03-15 12:02:51 IST
मणिपुर में भाजपा के पास 30 से ज्यादा विधायक,बीरेन सिंह होंगे मुख्यमंत्री

इंफाल।

मणिपुर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद सरकार नहीं बना पाई। 21 विधायकों के साथ दूसरे नंबर की रही भाजपा ने बहुमत का आंकड़ा जुटा लिया और सरकार बनाने जा रही है। गर्वनर नजमा हेपतुल्ला ने भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया है। उन्होंने कहा,भाजपा के पास 30 से ज्यादा विधायक हैं। ये मणिपुर के लिए अच्छा होगा। यहां स्थायीत्व की जरूरत है। ये मणिपुर के लिए फायदेमंद है। 

नागा पीपुल्स फ्रंट(एनपीएफ) के 4,नेशनल पीपुल्स पार्टी(एनपीपी) के 4 विधायक भाजपा को समर्थन दे चुके हैं। 60 सीटों वाली मणिपुर विधानसभा में बहुमत के लिए 31 सीटें चाहिए। भाजपा विधायक दल के नेता बीरेन सिंह ने सोमवार को राज्यपाल से मुलाकात कर 32 विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया था। राजभवन के सूत्रों के मुताबिक एनपीएफ के विधायकों ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने में भाजपा के समर्थन की बात कही। 

राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला खुद एनपीएफ के विधायकों से मिलकर इस बात की पुष्टि करना चाहती थी कि वो मणिपुर की त्रिशंकु विधानसभा में किस पार्टी को समर्थन दे रहे हैं। इससे पहले भाजपा ने राज्यपाल को एनपीएफ के 4 विधायकों के समर्थन का दावा किया और इस संबंध में एनपीएफ अध्यक्ष का पत्र गर्वनर को सौंपा। एनपीपी प्रेसिडेंट और उनके 4 एमएलए,एक कांग्रेस और एक एलजेपी और एक टीएमसी के विधायक ने भाजपा को समर्थन दिया है। ये सभी राज्यपाल से मुलाकात कर चुके हैं। 

भाजपा विधायकों ने सोमवार को एन.बिरेन सिंह को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना था। बाद में सिंह ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था। 60 सदस्यों वाली मणिपुर विधानसभा में कांग्रेस 28 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी। भाजपा के खाते में 21 सीटें आई हैं। कांग्रेस नेता इबोबी सिंह का कहना था कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए था। इबोबी सिंह पिछले 15 साल से सूबे के मुख्यमंत्री हैं। वह 2002 से ही मुख्यमंत्री हैं। 

बिरेन सिंह ने बीते साल अक्टूबर में कांग्रेस पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। बिरेन सिंह हीनगैंग विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। वह राज्य में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री होंगे। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के पांगीजम शरतचंद्र सिंह को हराया है। फुटबाल खिलाड़ी से पत्रकार और फिर राजनेता बने बिरेन सिंह एक समय निवर्तमान मुख्यमंत्री इबोबी सिंह के खास सहयोगी थे। मुख्यमंत्री पद के एक अन्य दावेदार भाजपा विधायक थोंगम विश्वजीत भी थे। इबोबी सिंह ने सोमवार देर रात इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा था कि राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया का रास्ता बनाने के लिए मंगलवार तक अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। इबोबी सिंह और राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष टीएन हवाकिप ने रविवार रात राज्यपाल से मुलाकात की थी। इस बैठक में गर्वनर ने इबोबी सिंह को तुरंत इस्तीफा देने को कहा था। 

गर्वनर नजमा हेपतुल्ला ने मंगलवार शाम मीडिया से कहा कि उन्होंने भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है। शपथग्रहण बुधवार दोपहर 1 बजे होगा। मेरे 37 साल के संसदीय करियर में जब मैं कांग्रेस में थी और गैर कांग्रेसी सरकार के साथ काम करती थी तब भी मुझ पर ऐसे आरोप नहीं लगाए गए। मैं ये जानती हूं कि कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है लेकिन राज्यपाल का फर्ज होता है कि वो सरकार में स्थायीत्व को भी आंके। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी रूलिंग में कहा है कि ये गर्वनर का काम है कि वो मेजॉरिटी और राज्य के स्थायीत्व के बारे में सही फैसला करे। मणिपुर को ज्यादा से ज्यादा विकास की जरूरत है। इसके अलावा यहां ज्यादा से ज्यादा रोजगार की जरूरत है। ऐसे में यहां स्थायीत्व होना जरूरी है।