आंदोलन असफलता में मोर्चा के शीर्ष नेता जिम्मेदार : विनय तामांग

Daily news network Posted: 2017-10-12 18:54:38 IST Updated: 2017-10-12 18:54:38 IST
आंदोलन असफलता में मोर्चा के शीर्ष नेता जिम्मेदार : विनय तामांग
  • गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन के बोर्ड आफ एडमिनिस्ट्रेशन के चेयरमैन विनय तामांग बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर कालिम्पोंग पहुंचे। जिले में आगमन पर बीओए अध्यक्ष का तीस्ता से लेकर डेलो टूरिस्ट लाज तक जोरदार स्वागत हुआ।

कालिम्पोंग

कालिम्पोंग : गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन के बोर्ड आफ एडमिनिस्ट्रेशन के चेयरमैन विनय तामांग बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर कालिम्पोंग पहुंचे। जिले में आगमन पर बीओए अध्यक्ष का तीस्ता से लेकर डेलो टूरिस्ट लाज तक जोरदार स्वागत हुआ। 

शहर में भी जगह जगह कार्यकर्ताओं ने तामांग का जोरदार स्वागत किया। डेलो पहुंचे तामांग ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। समर्थकों द्वारा अपने स्वागत से गदगद तामांग ने बताया कि यह स्वागत विनय तामांग का नही वरन गोरखालैंड का है।

तामांग ने अपने दो घंटे चले संबोधन में बताया कि दार्जिलिंग में लोग उनसे सुबह छह बजे से रात 11 बजे तक लगातार मिल रहे हैं। अध्यक्ष ने कहा कि इन दिनों लोगों के मन में कई तरह के सवाल चले रहे हैं सोशल साइट पर कई अफवाहें भी प्रसारित की जा रही हैं। 

तामांग ने इन सबसे लोगों को सावधान रहने की अपील की और सकारात्मक सोच रखने की मांग की। 2017 का आंदोलन गोरखालैंड आंदोलन नहीं था बल्कि विरोध था पहाड़ पर बांग्ला भाषा अनिवार्य करने का। 

बंद का निर्णय मोर्चा की दो सभाओं में हुआ उस वक्त मैं मिरिक में था जहां हालात ठीक नहीं थे। इस दौरान पहाड़ के लोगों को काफी तकलीफ का सामना करना पड़ा जिन्हे मैं समझ सकता हूं। 

पहाड़ पर अशांति के समय केंद्रीय गृह मंत्री लगातार संपर्क में थे और पहाड़ पर शांति के लिए प्रयासरत थे। उन्होने ही समस्या का हल निकालने के लिए राज्य सरकार से वार्ता का दबाव डाला।

 उनके दबाव के चलते ही राज्य सरकार द्वारा बैठक बुलाई गई जिसमें गोरामुमो समेत पहाड़ के प्रमुख राजनीतिक दल शामिल थे। मोर्चा नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि शीर्ष नेता मुकदमों के चलते छिपते घूम रहे थे जबकि मैं अपने ऊपर मुकदमे होने के बावजूद खुले आम सभाएं कर रहा था और आंदोलन के लोकतांत्रिक रहने पर जोर दे रहा था।

बैठक के विषय में विस्तार से बताते हुए तामांग ने कहा कि जब हम वार्ता के लिए कोलकाता के गोरखा भवन पहुंचे तो वहां तैयार छह सूत्रीय कार्यक्रम पर चर्चा की और हस्ताक्षर किया। कोलकाता जाने के क्रम में मुझे वार्ता से पहले पुलिस सादे कपड़ों में सीआईडी कार्यालय ले गई जहां मुझसे पुराने मामलों में पूछताछ भी की गई। इस दौरान कोलकाता में कुछ अज्ञात लेागों ने मुझे और अनित को भड़काने का भी प्रयास किया।

उक्त बैठक में जाप ने गोरखालैंड नहीं बल्कि पहाड़ के अस्थाई समाधान करने की माग रखा। गोरामुमो ने बिनय तमाग की बात को समर्थन दिया। तामांग ने कहा कि यह पहली बार हुआ जब सीएम ममता ने गोरखालैंड समेत पहाड़ के अन्य विषयों पर बातचीत की। 

हालांकि बैठक में गोरखालैंड की बात मजबूती से रखने के बावजूद पहाड़ पर उन्हे भारी विरोध झेलना पड़ा और मीरजाफर तक की उपाधि दे डाली गई। अपने ऊपर लगे आरोपों पर दुख जताते हुए तामांग ने कहा कि अब तक कभी इतना आघात नहीं पहुंचा जितना इन आरोपों के बाद पहुंचा। बीओए प्रमुख ने कहा कि बैठक के बाद ही बंद को स्थगित करने का ऐलान किया गया।

 तामांग ने साफ हुए कहा कि यदि गोरखालैंड आंदोलन असफल हुआ है तो उसमें सात मोर्चा नेताओं की अहम भूमिका है जिनमें रोशन गिरी मुख्य हैं। उन्होने गिरी पर आरोप लगाते हुए कहा कि मोर्चा महासचिव आंदोलन के समय दिल्ली भाग गए और परिवार के साथ वहीं बस गए।

 वहीं से मुझे मोर्चा से निकालने का निर्णय लिया गया। विनय तामांग ने आशंका व्यक्त करते हुए कहा कि रोशन गिरी के पास गोजमुमो के करोड़ों रूपये हैं। उन्होने विमल गुरुंग और रोशन गिरी की गलत रणनीति के कारण आंदोलन को असफल होना बताया।