जमीयत उलेमा ए हिंद के प्रमुख मदनी के खिलाफ शिकायत दर्ज, उगला था जहर

Daily news network Posted: 2017-11-15 13:13:37 IST Updated: 2017-11-15 13:13:37 IST
जमीयत उलेमा ए हिंद के प्रमुख मदनी के खिलाफ शिकायत दर्ज, उगला था जहर
  • शहर के एक पत्रकार ने मंगलवार को जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी व सोशल साइंटिस्ट हिरेन गोहेन के खिलाफ बसिस्था पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

ईटानगर।

शहर के एक पत्रकार ने मंगलवार को जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी व सोशल साइंटिस्ट हिरेन गोहेन के खिलाफ बसिस्था पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। एनआरसी अपडेट पर कथित सांप्रदायिक बयानों को लेकर यह शिकायत दर्ज कराई गई है। नाथ ने कहा कि उन्होंने अपनी शिकायत में लिखा है कि मदनी ने जो बयान दिए थे उनसे असम में सांप्रदायिक सौहार्द पर प्रभाव पड़ सकता है और गोहेन ने उनका समर्थन किया था। बकौल नाथ, मदनी ने राज्य सरकार की भी आलोचना की थी लेकिन एनआरसी अपडेट की सुप्रीम कोर्ट प्रत्यक्ष रूप से निगरानी कर रहा है। इसलिए राज्य सरकार का सेकेण्ड्री व निष्क्रिय भूमिका है। असम भाजपा के प्रवक्ता मनोज बरुआ ने मंगलवार को मदनी की आलोचना करते हुए कहा, कई ताकते हैं जो एनआरसी अपडेट को रोकने की कोशिश कर रही है।

मदनी के बयानों से असम के तबाह होने का संदेश गया है। हम इसे सहन नहीं करेंगे। हम गोहेन की भूमिका से हैरान हैं। वह सम्मानित बुद्धिजीवी हैं। सरकार को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। असम गण परिषद के प्रवक्ता मनोज सैकिया ने कहा, मदनी और कांग्रेस एनआरसी अपडेट को विफल करने के लिए सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न करने की कोशिश कर रही है। 24 मार्च 1971 की मध्य रात्रि के बाद जिन अवैध प्रवासियों ने राज्य में प्रवेश किया था, चाहे उनका कोई भी धर्म हो, उन्हें जाना होगा। वार्ता समर्थक उल्फा नेता अनूप चेतिया ने कहा, मदनी विभिन्न समुदायों के बीच सौहार्द को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं।

असम में सिर्फ असमिया लोगों की रिट एप्लाई होगी। जिन्हें खुद को असमिया कहने में शर्म आती है उन्हें राज्य छोड़कर चले जाना चाहिए। हम लोगों से उन पर विश्वास नहीं करने को कहा है। इंटेलेक्चुअल अब्दुल मन्नन जो दिल्ली में हुई मीटिंग में मौजूद थे, ने कहा, मदनी और गोहेन के भाषणों में कुछ भी विवादित नहीं है। हमने सिर्फ असम के मौजूदा हालात और अल्पसंख्यक लोग जो खतरा महसूस कर रहे हैं, उस पर चर्चा की। आपको बता दें कि गोहेन पहले ही कह चुके हैं कि मदनी के बयान उनके निजी विचार हैं। नई दिल्ली में सोमवार को पब्लिक मीटिंग के दौरान मदनी ने कहा, अगर पंचायत की ओर से जारी निवास प्रमाण पत्र को नागरिकता के दावे के लिए वैध दस्तावेज नहीं माना जा रहा है तो लाखों महिलाएं जो असम की मूल निवासी हैं, उनकी राष्ट्रीयता से वंचित रह जाएगी। इससे भारत दूसरे म्यांमार में बदल जाएगा।

मदनी ने कहा था, केन्द्र व राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारें आने के बाद प्रमाण पत्रों की समस्या खड़ी हुई है। एनआरसी से महिलाओं को हटाने के लिए जमीन तैयार करने के वास्ते कोशिशें की जा रही है। ऐसी 48 लाख महिलाएं हैं। वे उनकी राष्ट्रीयता से वंचित हो जाएगी। इन लोगों को भारत से धकेल दिया जाएगा। म्यांमार में जो हालात हैं, वे अब भारत को दूसरा म्यांमार बनाना चाहते हैं। मदनी ने महिलाओं की जो संख्या बताई थी गोहेन उससे सहमत नहीं थी। उन्होंने कहा, हालात को लेकर मदनी जी ने जो कुछ कहा, हम उससे सहमत हैं लेकिन सवाल 27 लाख महिलाओं का है, 48 लाख का नहीं।