दार्जिलिंग में जारी गतिरोध समाप्त करने के लिए केंद्र से वार्ता शुरु करने का अनुरोध

Daily news network Posted: 2017-08-13 13:12:40 IST Updated: 2017-08-13 13:12:40 IST
दार्जिलिंग में जारी गतिरोध समाप्त करने के लिए केंद्र से वार्ता शुरु करने का अनुरोध
  • जीएमसीसी ने केंद्र सरकार से दार्जिलिंग की पहाडिय़ों में हालात सामान्य करने के लिए सभी पक्षों के साथ बातचीत शुरु करने का अनुरोध किया

दार्जिलिंग।

गोरखालैंड आंदोलन समन्वय समिति (जीएमसीसी) ने केंद्र सरकार से दार्जिलिंग की पहाडिय़ों में हालात सामान्य करने के लिए सभी पक्षों के साथ बातचीत शुरु करने का अनुरोध किया, जहां अनिश्चितकालीन बंद का आज 59वां दिन था। जीएमसीसी ने कलिमपोंग में एक आपात बैठक में कहा कि पहाडिय़ों में बंद तब तक रहेगा, जब तक केंद्र की ओर से हालात सामान्य करने के लिए कदम नहीं उठाए जाते। 



पृथक गोरखालैंड के लिए जारी आंदोलन में हिस्सा ले रहे 30 पहाड़ी दलों का सर्वोच्च निकाय जीएमसीसी ही है। जीएमसीसी क समन्वयक कल्याण दीवान ने बैठक के बाद बताया कि हम केंद्र सरकार से वार्ता प्रक्रिया शुरु करने  का अनुरोध करते हैं ताकि पहाडिय़ों में हालात सामान्य हो सकें। अगर राज्य सरकार इस प्रक्रिया का हिस्सा होगी तो हमें कोई समस्या नहीं है। समिति ने पुलिस द्वारा की गई हालिया गिरफ्तारियों तथा पिछले कुछ दिनों से पहाडिय़ों पर क्षेत्र विशेष में हो रहे मार्च की निंदा की। 



यह पूछे जाने पर क्या स्वतंत्रता दिवस पर बंद में छूट दिए जाने का कोई निर्णय लिया गया है, दीवान ने कहा, सभी पहाड़ी दलों और जीजेएम अध्यक्ष बिमल गुरुंग के बीच बातचीत होने के बाद जल्द ही इस बारे में फैसला किया जाएगा, लेकिन पहाडिय़ों के लोग देशभक्त हैं और हम यहां स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे। हर घर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा और हम तिरंगा ले कर रैलियां करेंगे। 



सूत्रों ने बताया कि अनिश्चितकाली बंद को जारी रखने को लेकर गोरखा जनमुक्ति मोर्चा और जीएमसीसी में शामिल अन्य पहाड़ी दलों के बीच गहरे मतभेद हैं। उन्होंने बताया कि जीजेएम के पूर्व प्रवक्ता हराक बहादुर क्षेत्री की जन आंदोलन पार्टी सहित कुछ दल विरोध प्रदर्शन जारी रखने के पत्र में हैं, वहीं अन्य दल पहाडिय़ों में बंद को वापस लेना चाहते हैं। जीएमसीसी में 30 सदस्य हैं, जो जीजेएम, जीएनएलेफ, जोएपी और भारतीय गोरखा परिसंघ सहित पहाड़ी क्षेत्र के सभी दलों का प्रतिनिधित्व करते हैं।