झूठे मामलों में फंसाकर सरकार दबाना चाहती है अलग राज्य की मांग

Daily news network Posted: 2017-12-06 16:45:57 IST Updated: 2017-12-06 16:45:57 IST
झूठे मामलों में फंसाकर सरकार दबाना चाहती है अलग राज्य की मांग
  • अलग राज्य की मांग कर रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता विमल गुरुंग ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार उसके

दार्जलिंग

अलग राज्य की मांग कर रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता विमल गुरुंग ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार उसके सदस्यों को झूठे मामलों में फंसाकर अलग गोरखालैंड की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को खत्म करने का प्रयास कर रही है.


कोर्ट में गुरुंग के वकील ने दावा किया कि राज्य सरकार गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के सदस्यों के खिलाफ  दुर्भावनापूर्ण तरीके  से कार्रवाई कर रही है और इस वजह से दार्जिलिंग में लगातार भय का माहौल बना हुआ है.


      

गुरुंग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने मोर्चा के सदस्यों के खिलाफ दर्ज मामलों और पुलिस द्वारा उनकी न्यायेतर हत्याओं की घटनाओं की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने का अनुरोध किया क्योंकि राज्य पुलिस से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है. उन्होंने कहा:   हम निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं कर सकते. यह उत्पीड़न है. इसलिए किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की आवश्यकता है.  हालांकि पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी ने कहा कि शीर्ष अदालत के समक्ष मोर्चा के नेता की दलीलों के गंभीर नतीजे हैं क्योंकि वहां सार्वजनिक अव्यवस्था की स्थिति है.

    


सुनवाई के दौरान पटवालिया ने पुलिस द्वारा मानव अधिकारों के हनन और न्यायेत्तर हत्याओं का मुद्दा उठाया और इस तरह के अनेक कथित मामलों का जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि राज्य पुलिस ने सिक्किम में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के समर्थक की गोली मारकर हत्या कर दी और इस पुलिस अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. पटवालिया ने कहा कि राज्य सरकार इस तरह से काम नहीं कर सकती क्योंकि अलग गोरखालैंड राज्य के लिये लंबे समय से आंदोलन चल रहा है ओर गुरुंग इन मामलों में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने का ही अनुरोध शीर्ष अदालत से कर रहे हैं.


    

 इस मामले में मंगलवार को भी बहस अधूरी रही. न्यायालय अब आठ दिसंबर को आगे सुनवाई करेगा. गौरतलब है कि इससे पहले, गुरुंग ने दावा किया था कि पश्चिम बंगाल के स्कूलों में बांग्ला भाषा को अनिवार्य बनाने के राज्य सरकार के कदम का गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने विरोध किया था और यही टकराव का मुख्य बिंदु है.  दूसरी ओर, राज्य पुलिस का दावा है कि गुरुंग फरार हैं और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच में सहयोग करने की बजाय  राजनीति  कर रहे हैं. पुलिस के अनुसार उनके खिलाफ 23 मुकदमे चल रहे हैं और अनेक आपराधिक मामले भी उनके खिलाफ दर्ज हैं