चकमा और हजांग शरणार्थियों के लिए खुशखबरी, केंद्र सरकार ने की ये घोषणा

Daily news network Posted: 2017-09-13 21:21:09 IST Updated: 2017-09-13 21:29:52 IST
चकमा और हजांग शरणार्थियों के लिए खुशखबरी, केंद्र सरकार ने की ये घोषणा
  • केंद्र सरकार लगभग पांच दशक पहले तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से भारत में आये करीब एक लाख चकमा और हजांग शरणार्थियों को जल्द ही भारतीय नागरिकता प्रदान कर देगी।

नई दिल्ली।

केंद्र सरकार लगभग पांच दशक पहले तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से भारत में आये करीब एक लाख चकमा और हजांग शरणार्थियों को जल्द ही भारतीय नागरिकता प्रदान कर देगी।

गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि पूर्वोत्तर राज्यों में रह रहे अधिकांश चकमा और हजांग शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने से स्थानीय नागरिकों के अधिकारों में कोई कटौती नहीं होने दी जायेगी। 

चकमा और हजांग शरणार्थियों के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में चर्चा की गयी।

 

उच्चतम न्यायालय ने साल 2015 में चकमा और हजांग शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का आदेश दिया था। इनमें से अधिकांश शरणार्थी अरुणाचल प्रदेश में रह रहे हैं। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, रिजीजू और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की मौजूदगी में हुई बैठक में अदालत के इस फैसले को लागू करने की कार्ययोजना पर चर्चा की गयी। बैठक के बाद रिजीजू ने कहा कि इन शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने के लिए बीच का रास्ता अपनाया जायेगा जिससे न्यायपालिका के आदेश का पालन भी सुनिश्चित हो सके और स्थानीय लोगों के अधिकारों में कोई कटौती भी न हो।

उन्होंने कहा कि चकमा शरणार्थी अरुणाचल प्रदेश में 1964 से रह रहे हैं और इन्हें नागरिकता देने संबंधी अदालत के आदेश का यथाशीघ्र पालन करने की जरूरत है। स्वयं अरुणाचल प्रदेश से ताल्लुक रखनेवाले रिजीजू ने भरोसा दिलाया कि इससे स्थानीय लोगों और आदिवासी समुदायों के नागरिक अधिकारों में कोई कटौती नहीं होगी। अरुणाचल प्रदेश के तमाम सामाजिक संगठन शरणार्थियों को नागरिकता देने का विरोध कर रहे हैं। इनकी दलील है कि इससे राज्य की जनसांख्यिकी की स्थिति बदल जायेगी। इसके मद्देनजर केंद्र सरकार बीच का रास्ता निकालने की कोशिश करते हुए चकमा और हजांग शरणार्थियों को जमीन खरीदने सहित अन्य अधिकार नहीं देने के प्रस्ताव सहित अन्य विकल्पों पर विचार कर रही है।