चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देगी मोदी सरकार

Daily news network Posted: 2017-09-13 15:02:12 IST Updated: 2017-09-13 15:02:12 IST
चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देगी मोदी सरकार
  • म्यांमार से विस्थापित रोहिंग्या मुस्लिमों को शरण देने की मांग के बीच केन्द्र सरकार ने करीब एक लाख चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने जा रही है

नई दिल्ली।

म्यांमार से विस्थापित रोहिंग्या मुस्लिमों को शरण देने की मांग के बीच केन्द्र सरकार ने करीब एक लाख चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने जा रही है। करीब एक दशक पहले ये लोग पूर्वी पाकिस्तान से आए थे, जो फिलहाल नॉर्थ ईस्ट में बने शिविरों में रह रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में केन्द्र सरकार को चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को नागरिकता देने का निर्देश दिया था। चकमा और हाजोंग शरणार्थी ज्यादातर अरुणाचल प्रदेश में रह रहे हैं।


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मोदी सरकार चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने जा रही है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह बुधवार को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू से इस मसले पर चर्चा करेंगे। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। खांडू चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को यह कहते हुए नागरिकता देने का विरोध कर रहे हैं कि इससे राज्य की डेमोग्राफी बदल जाएगी। केन्द्र सरकार मसले का वर्किंग सोल्युशन निकालने की कोशिश कर रही है।


केन्द्र ने प्रस्ताव दिया है कि चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को जमीन की ओनरशिप समेत वो अधिकार नहीं दिए जाएंगे जो अरुणाचल प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों को है। हालांकि शरणार्थियों को इनर लाइन परमिट्स दी जा सकती है, जो अरुणाचल प्रदेश में गैर स्थानीय लोगों के लिए जरूरी है। इनर लाइन परमिट्स उन्हें यात्रा और काम की अनुमति देती है। चकमा और हाजोंग मूलत: पूर्वी पाकिस्तान की चिटगांव हिल ट्रैक्ट्स के निवासी हैं। जिन्होंने अपनी मातृभूमि को छोड़ दिया था। 1960 के दशक में कापतई डेम प्रोजेक्ट ने इनकी मातृभूमि को जलमग्न कर दिया था। चकमा बौद्ध धर्म को मानते हैं जबकि हाजोंग हिंदू हैं। उन्हें धार्मिक उत्पीडऩ का शिकार होना पड़ा था। ये लोग असम के लुशाई हिल्स डिस्ट्रिक्ट (अब मिजोरम) के जरिए भारत में घुसे थे। अधिकारियों के मुताबिक इन शरणार्थियों की संख्या 1964 से 69 के दौरान 5 हजार थी जो बढ़कर 1 लाख हो गई है। इस वक्त उनके पास न तो नागरिकता है और न ही जमीन के अधिकार लेकिन राज्य सरकार की ओर से उन्हें मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जाती है।


2015 में सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र को इन शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने का निर्देश दिया था। अरुणाचल प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से उसके आदेश की समीक्षा के लिए कहा लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने जब अपने आदेश की समीक्षा से इनकार कर दिया तो केन्द्र व अरुणाचल प्रदेश की सरकार ने इस मसले का समाधान खोजने के लिए सलाह मशविरा शुरू किया। चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने का कदम उस वक्त सामने आया है जब केन्द्र सरकार म्यांमार से विस्थापित होकर भारत आए रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस भेजने की योजना बना रही है। गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू जो अरुणाचल प्रदेश से आते हैं, ने कहा है कि रोहिंग्या अवैध प्रवासी हैं, उन्हें वापस भेजा जाएगा।