उग्रवादी संगठन उल्फा में शामिल हो रहे प्यार में धोखा खा चुके लड़के!

Daily news network Posted: 2017-05-17 13:49:20 IST Updated: 2017-05-17 13:49:20 IST
उग्रवादी संगठन उल्फा में शामिल हो रहे प्यार में धोखा खा चुके लड़के!
  • असम में सक्रिय प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असोम(उल्फा-आई) में कई ऐसे युवा भर्ती हुए हैं जो प्यार में धोखा खा चुके हैं

गुवाहाटी।

असम में सक्रिय प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असोम(उल्फा-आई) में कई ऐसे युवा भर्ती हुए हैं जो प्यार में धोखा खा चुके हैं। समाचार पत्र ईस्टर्न क्रोनिकल ने इंटेलिजेंस ऑपरेटिव के जरिए यह जानकारी दी है। समाचार पत्र के मुताबिक लड़कियों के सामने खुद को ताकतवर साबित करने के लिए कई लड़के अपनी इच्छा से उल्फा-आई में शामिल हुए हैं। इन लड़कों को संगठन की विचारधारा के बारे में कुछ पता नहीं होता।



उग्रवादी संगठन की नजर उन लड़कों पर भी रहती है जिन्हें स्कूल से निकाला दिया गया होता है। साथ ही वे उन लड़कों को भी संगठन ज्वाइन करने के लिए राजी करते हैं जिनका दिल टूट चुका है। खुफिया गुप्तचर ने बताया कि प्यार में चोट खा चुके पिछड़े क्षेत्र के युवा उल्फा-आई के लिए सबसे कमजोर कड़ी होते हैं। हाल ही में यह देखा गया है कि उन्होंने स्वेच्छा से संगठन ज्वाइन किया है। दो से तीन मामलों में यह जानकारी सामने आई है। जब वे प्यार में ठुकरा दिए जाते हैं तो उन्हें लगता है कि समाज उन्हें नीचा दिखाएगा। खुद को रिजेक्टेड और डिजेक्टेड महसूस करने के चलते वे घर से भाग जाते हैं और उग्रवादी संगठन में शामिल हो जाते हैं ताकि लड़कियों के सामने यह साबित कर सकें कि अब वे पावरफुल लोग हैं। 



हाल ही में असम के डीजीपी मुकेश सहाय ने खुलासा किया था कि उल्फा-आई असम के विभिन्न इलाकों से युवाओं की भर्ती कर रहा है। उल्फा का कमांडर इन चीफ परेश बरुआ म्यांमार से अपनी गतिविधियां चला रहा है। उसके निर्देश पर ही उल्फा-आई युवाओं की भर्ती कर रहा है। ऑपरेटिव ने कहा कि युवाओं की भर्ती नया ट्रेंड नहीं है। जब से उन्होंने उल्फा-आई का गठन किया है तब से वे मैनपावर को बढ़ाकर अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे पिछड़े क्षेत्रों के युवाओं को लुभाने की कोशिश करते हैं। उनकी कोशिश होती है कि युवा उनके ऑपरेशन और मिशन से जुड़ें। 




उल्फा-आई की मुख्यतया असम और अरुणाचल प्रदेश के अविकसित सीमावर्ती इलाकों से लोगों को भर्ती करते हैं। यह कहा जा सकता है कि उग्रवादी संगठन में भर्ती होने वाले युवाओं को उसकी विचारधारा के बारे में पता नहीं होता। कई युवा तो असम के छोटे से अंश के बारे में भी नहीं जानते। प्यार में रिजेक्ट होने के बाद शर्मिंदगी से बचने के लिए वे घर से भाग जाते हैं और उग्रवादी संगठन में शामिल हो जाते हैं। इंटेलिजेंस ऑपरेटिव के मुताबिक स्कूल से निकाले गए लड़के कुछ ज्यादा ही अहम पाल लेते हैं। उन्हें हाथ से किए जाने वाले काम को  करने में शर्म आती है। ऐसे युवाओं को पलायनवादी कहा जा सकता है। ये सच्चाई से भागने के लिए उग्रवादी संगठन में शामिल हो जाते हैं। 




आपको बता दें कि उग्रवादी संगठन एनएससीएन(के)भी संगठन में बच्चों की भर्ती कर चुका है। बच्चों को इसलिए भर्ती किया गया क्योंकि उनका जल्दी ब्रैनवॉश किया जा सकता है। 2015 में इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि एनएससीएन(के) ने 15 साल से कम उम्र के 15 बच्चों को भर्ती किया था। इन बच्चों को फेक जिले से उठाया गया था। इन बच्चों को म्यांमार में स्थित एक शिविर में ले जाया गया था। वहां से इन्हें बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग के लिए म्यांमार के ही जियाकचिंग भेजा गया।