आईआईटी गुवाहाटी के प्रोफेसर पर लगा था रेप का आरोप, फिर हुआ बहाल

Daily news network Posted: 2017-08-11 15:54:32 IST Updated: 2017-08-11 15:54:32 IST
आईआईटी गुवाहाटी के प्रोफेसर पर लगा था रेप का आरोप, फिर हुआ बहाल
  • गुवाहाटी हाईकोर्ट ने आईआईटी गुवाहाटी के प्रोफेसर को फिर से पद पर बहाल करने का आदेश दिया

गुवाहाटी।

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने आईआईटी गुवाहाटी के प्रोफेसर को फिर से पद पर बहाल करने का आदेश दिया है। संस्थान के नॉन टीचिंग स्टाफ के रेप के आरोप में प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया गया था। जस्टिस अरुप कुमार गोस्वामी ने अपने आदेश में कहा कि अलोके कुमार घोषाल को इस आधार पर आईआईटी गुवाहाटी में केमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर पद पर बहाल करें क्योंकि उनके निलंबन का आदेश कालातीत हो गया है। साथ ही यह 19 जून 2015 को 180 दिन की मियाद खत्म होने के बाद अवैध हो गया है।


कुमार घोषाल को 16 दिसंबर 2014 को गिरफ्तार किया गया था। निलंबन का आदेश 17 दिसंबर 2014 को जारी किया गया था। कोर्ट ने सेंट्रल सिविल सर्विसेज (क्लासिफिकेशन, कंट्रोल एंड अपील)रूल्स 1965 के 10 वें रूल्स का उदाहरण देते हुए यह आदेश दिया। बाद में कोर्ट के आदेश की सर्टिफाइड कॉपी जारी कर दी गई है। घोषाल एकेडमिक अफेयर्स के डीन और पीर रिव्यू सेक्शन के इंचार्ज भी थे।


हालांकि कोर्ट ने इन दो पदों पर बहाली का आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ये पूरी तरह से प्रशासनिक पद है। ये पद ऑफर करना संस्थान का विशेषाधिकार है। घोषाल पश्चिम बंगाल के हुगली जिले का रहने वाला है। ऑफिस असिस्टेंट ने पानबाजार के ऑल वुमन पुलिस स्टेशन में घोषाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। ऑफिस असिस्टेंट ने घोषाल पर यौन उत्पीडऩ का आरोप लगाया था।


पीडि़ता ने दावा किया था कि घोषाल ने उसे फोन पर धमकी दी थी कि शिकायत दर्ज ना कराएं। आरोपी ने दिसंबर 2002 में आईआईटी गुवाहाटी में केमिकल इंजीनियरिंग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर ज्वाइन किया था। उसे 2005 में एसोसिएट प्रोफेसर और 2007 में प्रोफेसर पोस्ट पर प्रमोट किया गया था। आईआईटी गुवाहाटी में पोस्टिंग से पहले घोषाल पिलानी स्थित बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज(बिट्स पिलानी)में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दे चुका था। वह बिट्स पिलानी में 1998 से 2002 तक रहा। 16 मार्च 2015 को उसे जमानत पर रिहा किया गया था। कामरुप के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर उसे जमानत मिली थी। गिरफ्तारी के 90 दिन बाद भी पुलिस घोषाल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई थी।