शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन त्रिपुरा विधानसभा में हुआ हाई वोल्टेज ड्रामा

Daily news network Posted: 2017-11-15 12:20:00 IST Updated: 2017-11-15 12:20:00 IST
शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन त्रिपुरा विधानसभा में हुआ हाई वोल्टेज ड्रामा
  • शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन मंगलवार को त्रिपुरा विधानसभा में हाई वोल्टेड ड्रामा हुआ। आपको बता दें कि त्रिपुरा में अगले साल फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है।

अगरतला।

शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन मंगलवार को त्रिपुरा विधानसभा में हाई वोल्टेड ड्रामा हुआ। आपको बता दें कि त्रिपुरा में अगले साल फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है। विधानसभा का कार्यकाल 14 मार्च को समाप्त हो रहा है। तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए 6 विधायकों को अभी तक भाजपा सदस्य के रूप में आधिकारिक मान्यता नहीं दी गई है। भाजपा के विधायकों ने मंगलवार को यह मुद्दा विधानसभा में उठाया। उनकी सत्तारुढ़ लेफ्ट फ्रंट के विधायकों से तीखी नोंक झोंक हुई। राजस्व व स्वास्थ्य मंत्री बादल चौधरी ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष सुदीप रॉय बर्मन को राजनीतिक गद्दार बताया।

सुदीप रॉय कांग्रेस विधायक थे। बाद में वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। अगस्त में वह भाजपा में शामिल हो गए। बादल चौधरी के बयान के बाद सुदीप रॉय बर्मन ने स्पीकर से स्पष्टीकरण मांगा। मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए विधानसभा अध्यक्ष रामेन्द्र चंद्र देबनाथ ने सदन को बताया कि विधानसभा का सत्र शुरू होने से दो दिन पहले 6 विधायक उनसे मिले थे। उन्होंने भाजपा विधायक के रूप में मान्यता देने की माग को लेकर पत्र सौंपे थे। इतने कम वक्त में आधिकारिक मान्यता देने संभव नहीं है। इसमें कुछ वक्त लगेगा। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि 6 विधायकों को प्रक्रिया के लिए तृणमूल कांग्रेस से जवाब मांगने और कानूनी सलाह के लिए कहा गया है।

स्पीकर के स्पष्टीकरण के बाद नाराज सुदीप रॉय बर्मन ने उन्हें यह कहते हुए आश्वस्त करने की कोशिश की, कि असेंबली प्रोसिजर के 10 वें शेड्यूल के तहत उन्हें यह कहने का विशेषाधिकार है कि वे भाजपा को रिप्रजेंट कर रहे हैं। हालांकि स्पीकर ने सभी दलीलों को खारिज कर दिया। इसके बाद 6 विधायक खड़े हो गए और स्पीकर के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। सुदीप रॉय बर्मन के नेतृत्व में पांच विधायकों, आशीष कुमार साहा, बिस्व बंधु सेन, प्रांजित सिंह रॉय, दिलीप सरकार और दिबा चंद्र, सैंकड़ों तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ 7 अगस्त को भाजपा में शामिल हुए थे। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से इन 6 विधायकों को भाजपा के सदस्य के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद बाद पार्टी 60 सदस्यीय विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल बन जाएगी। 60 सदस्यीय विधानसभा में सत्तारुढ़ सीपीआईएम के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट के 51 विधायक हैं। कांग्रेस के तीन विधायक हैं।

तृणमूल कांग्रेस के 6 विधायकों ने पिछले साल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था और 2016 में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के लेफ्ट के साथ गठबंधन के विरोध में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इन 6 विधायकों के अलावा कांग्रेस के बागी रतन लाल नाथ ने 17 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को वोट दिया था। हिमंता बिस्वा सरमा जो पहले कांग्रेस में थे और असम में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए थे, ने तृणमूल कांग्रेस के 6 विधायकों की भाजपा में एंट्री करवाई थी।