ऐतिहासिक है केरल का शहर 'कोच्चि'

Daily news network Posted: 2017-09-14 19:57:58 IST Updated: 2017-09-14 19:57:58 IST
ऐतिहासिक है केरल का शहर 'कोच्चि'
  • कोच्चि विश्व के सर्वोत्तम प्राकृतिक बंदरगाहों में गिना जाता है और इस प्रकार कोच्चि संपूर्ण विश्व से आने वाले समुद्री प्रर्यटकों के लिए स्वर्ग बन गया और जब 15वीं शताब्दी में पुर्तगाली यहां आए, तब यह भारत का पहला यूरोपियन शहर बना।

कोच्चि विश्व के सर्वोत्तम प्राकृतिक बंदरगाहों में गिना जाता है और इस प्रकार कोच्चि संपूर्ण विश्व से आने वाले समुद्री प्रर्यटकों के लिए स्वर्ग बन गया और जब 15वीं शताब्दी में पुर्तगाली यहां आए, तब यह भारत का पहला यूरोपियन शहर बना। 

सन् 1663 में डचों ने फोर्ट कोच्चि को फुर्तगालियों से छीन लिया और फिर औपनिवेशिक गाथा के अंतिम दौड़ में, 1795 में अंग्रेजों ने इस पर अपना कब्जा जमाया। 1660 के दशक के दौरान, फोर्ट कोच्चि ने मुख्य वाणिज्यिक केन्द्र के रूप में नई ऊंचाई प्राप्त की और एक समृद्ध व्यापार केन्द्र, प्रमुख सैन्य अड्डा, जीवंत सांस्कृतिक केन्द्र, जहाज निर्माण केन्द्र, ईसाई धार्मिक केन्द्र के रूप में इसकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली। आज, शताब्दियों बाद, इस शहर में 13 समुदायों के लोग मिलजुलकर रहते हैं।

कोच्चि के कुछ दिलचस्प नजारे हैं – वास्को डि गामा स्क्वायर के किनारे चाइनीज़ फिशिंग नेट, सेंटा क्रूज बेसिलिका, सेंट फ्रैंसिस चर्च, VOC गेट और बैस्टियन बंगलो इत्यादि।

चाइनीज फिशिंग नेट्स, टीक की लकड़ी और बांस के खूंटों के सहारे संतुलन के सिद्धांत का पालन करते हुए सीधे खड़े रहते हैं। आंकड़ों के मुताबिक इनकी स्थापना सबसे पहले सन् 1350 और सन् 1450 के बीच हुई थी। वास्को डि गामा स्क्वायर समुद्र तट के समांतर एक संकरा विहारस्थल है। इन नेट्स को नीचे झुकाकर और फिर समुद्र से खींचते हुए देखने के लिए यह स्थान सबसे उपयुक्त है।

सेंटा क्रूज़ बेसिलिका मूल रूप से पुर्तगालियों द्वारा बनाया गया चर्च है, जिसका वर्ष 1558 में पोप पॉल 1V द्वारा कैथेड्रल (प्रधान गिरिजाघर) के रूप में उत्थान किया गया। बाद में इसे डच विजताओं द्वारा नष्ट किया गया, जिन्होंने और भी कई कैथोलिक भवनों को नष्ट किया था। बाद में, ब्रिटिशों ने इस ढांचे को ढहा दिया और  1887 में विशप डॉम गोमेज़ वेरेरा ने एक नए भवन का निर्माण कराया। वर्ष 1905 में प्रतिष्ठित किए जाने के बाद पोप जॉन पॉल II  ने 1984 में सेंटा क्रूज को बेसिलिका के रूप में मान्यता दे दी।

फोर्ट कोच्चि भी भारत के एक प्राचीन चर्च- सेंट फ्रांसिस चर्च का आश्रय स्थल रहा है। 1503 से 1663 के बीच पुर्तगाली शासन के अधीन यह एक रोमन कैथलिक चर्च था, फिर 1664 से 1804 तक एक डच रिफॉर्मिस्ट चर्च रहा और 1804 से 1947 के बीच एक ऐंग्लिकन चर्च के रूप में रहा। आज इसका संचालन चर्च ऑफ साउथ इंडिया (सीएसआइ) द्वारा किया जाता है। इस चर्च के बारे में अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि वास्को डि गामा को यहीं दफनाया गया था, जिनकी मृत्यु 1524 में हुई थी। 14 वर्ष बाद उनके पार्थिव शरीर के अवशेष को पुर्तगाल वापस लौटा दिया गया । यहां की प्रत्येक निर्माण रचना-  सड़कें, दरवाजे, खिड़कियां तथा ईंटें भी अपनी एक अलग कहानी बयान करती हैं।

अनेक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के अलावा कोच्चि में अच्छे रेस्तरांओं की भी श्रृंखला है जहां ताजे समुद्री भोजन परोसे जाते हैं जो पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।