ये लड़का ना होता तो अरुणाचल में डेरा जमा लेते चीनी सैनिक

Daily news network Posted: 2018-01-10 18:32:56 IST Updated: 2018-01-10 18:32:56 IST
ये लड़का ना होता तो अरुणाचल में डेरा जमा लेते चीनी सैनिक

गुवाहाटी।

अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले के तूतिंग इलाके के बिशिंग गांव में चीनी घुसपैठ का खुलासा एक लड़के ने किया था। समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी घुसपैठ का भनक भारत को नहीं लगती अगर सामान ढुलाई का काम करने वाले स्थानीय युवक जॉन की नजर ना पड़ती। जॉन एक पोर्टर के तौर पर काम करता है और भारतीय चौकियों(आईटीबीपी) तक सामान पहुंचाता है।


जॉन ने इस इलाके में सड़क खुदाई की बड़ी बड़ी मशीनों को देखा था।  उस समय जॉन अपने रोजमर्रा के काम में लगे हुए थे। फौरन उन्होंने आईटीबीपी को अलर्ट किया था और बाद में सेना तक सूचना पहुंची। चीन तब तक यहां डेढ़ किलोमीटर की सड़क बना चुका था। बिशिंग गांव उस जगह से नजदीक है जहां चीन की सड़क बनाने वाली मशीनें चली थी। यह क्षेत्र वास्तविक नियंत्रण रेखा या मैकमोहन लाइन के 1.25 किलोमीटर अंदर की तरफ है। सड़क सियांग नदी के पूर्वी छोर पर बनाई गई थी,जो तिब्बत से बहकर आती है। वहां उसे यारलांग सांग्पो कहा जाता है।


वैसे तो चीन की टीम ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से काम शुरू किया था। बिशिंग तक गाड़ी से पहुंचने के लिए कोई सड़क नहीं है। तूतिंग सर्कल के अपर उपायुक्त इनचार्ज के.अपांग ने समाचार पत्र को बताया, हम नीतियों से बंधे हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के नियमों के अनुसार किसी गांव में कम से कम 100 लोग होने चाहिए तभी सरकारी सड़क वहां बना ई जा सकती है। बिशिंग की आबादी मात्र 54 है जिसमें 16 परिवार हैं। यही वजह है कि यहां अब तक सड़क नहीं बनी। वह जगह, जहां चीन की खुदाई करने वाली मशीनें पहुंची, वह इलाके का सबसे ऊंचाई वाला क्षेत्र है और यह करीब 4 हजार फीट है। बिशिंग से यहां तक पहुंचने के लिए करीब 8 से 10 दिन लग जाते हैं। ग्रामीणों को करीब 4 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है और उसके बाद सियांग नदी को पुल के जरिए पारकर जेलिंग पहुंचा जा सकता है। इसके आगे भी 4 किलोमीटर चलेंगे तब जाकर वह आखिरी प्वाइंट मिलेगा, जहां तक गाड़ी से आने जाने के लिए  सड़क बनी है।


अपांग ने बताया, वह इलाका जहां चीनी आ गए थे, वह काफी दुर्गम है और गांव के शिकारियों के अलावा दूसरा कोई नहीं पहुंच सकता। वहां खड़ी चढ़ाई है। इस घटना के सामने नहीं आने तक हम सभी सोचते थे कि यह इलाका नो मैन्स लैंड हैं क्योंकि वहां कोई नदी नहीं है, जिससे अंतरराष्ट्रीय सीमा का निर्धारण किया जा सके। हाल में जब हमने गूगल मैप देखा तब हमें अहसास हुआ कि यह हमारी जमीन है। चीन की टीम पहले ही 1250 मीटर(1.25 किमी) लंबी सड़क भारतीय क्षेत्र में बना चुकी थी। अब सब कुछ सामान्य है।