असम: हर दिन 17 लोग होते हैं अगवा,ज्यादातर मामले शादी के लिए घर से भागने के

Daily news network Posted: 2017-06-16 15:25:22 IST Updated: 2017-06-16 15:25:22 IST
असम: हर दिन 17 लोग होते हैं अगवा,ज्यादातर मामले शादी के लिए घर से भागने के
  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के (2015)आंकड़ों के मुताबिक असम में 2015 के दौरान अपहरण और बंधक बनाने (प्रत्येक 10 हजार लोगों के मामलों में)की दर 18.1 थी

गुवाहाटी।

असम में हाल ही में तीन साल की बच्ची त्रिशा को अगवा कर लिया गया। छह दिन बाद अपहरण करने वालों ने उसे गत शनिवार को पड़ोसी राज्य मेघालय में बिना नुकसान पहुंचाए छोड़ दिया। अभी तक उस नौकरानी के बारे में पता नहीं चल पाया है जो कथित रूप से असम यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर की बेटी को ले गई थी। बच्ची की मां भी असम यूनिवर्सिटी में डॉक्टर है। जिस वक्त नौकरानी बच्ची को ले गई उस वक्त दोनों घर पर नहीं थे। 



इस घटना को क्षेत्रीय मीडिया के अलावा राष्ट्रीय मीडिया ने भी कवर किया लेकिन अपहरण के कई ऐसे मामले हैं जिन्हेें इतना अटेंशन नहीं मिला है। असम में अपहरण के उतने मामले सामने नहीं आते जितने यूपी के आते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के 2015 के आंकड़ों के मुताबिक यूपी में 11999 अपहरण और बंधक बनाने के केस सामने आए। 




राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के (2015)आंकड़ों के मुताबिक असम में 2015 के दौरान अपहरण और बंधक बनाने (प्रत्येक 10 हजार लोगों के मामलों में)की दर 18.1 थी। पहले स्थान पर दिल्ली है जहां यह दर 37.0 है। राज्य में 2015 के दौरान कुल 5,831 मामले दर्ज किए गए। ये पूरे भारत में दर्ज हुए मामलों का 7 फीसदी है। असम में भी जितने मामले रिपोर्ट हुए उनमें से ज्यादातर पीडि़तों की उम्र 30 से 45 वर्ष है। देशभर में कुल 9139 मामले दर्ज हुए। इनमें से असम के 2016 मामले हैं। ये कुल मामलों का 22 फीसदी है। 




पिछले एक दशक से असम पुलिस के रिकॉर्ड भी दर्शाते हैं कि राज्य में किस तरह अपहरण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। 2006 में अपहरण के 1818 मामले दर्ज हुए थे। 2016 में यह संख्या बढ़कर 6,137 हो गई। दूसरे स्थान पर चोरी(12,846) के मामले हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि 2016 में हर दिन औसतन 17 लोगों का अपहरण हुआ। यह ट्रेंड इस साल भी जारी है। 




पहले दो महीने में ही 1000 मामले दर्ज हुए हैं लेकिन बढ़ते आंकड़ों के बावजूद पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कुछ अन्य राज्यों की तरह यहां संगठित अपराध गैंग्स शामिल नहीं है। असम के पुलिस प्रमुख मुकेश सहाय का कहना है कि असम में अपहरण और फिरौती के ज्यादा मामले नहीं हैं। उग्रवादी संगठनों की ओर से बंधक बनाए जाने के मामलों की संख्या भी कम हुई है। दर्ज होने वाले ज्यादातर मामले शादी के लिए भाग जाने के हैं। एनसीआरबी के 2015 के आंकड़ों के मुताबिक 2015 में कुल 4,141 मामले दर्ज हुए। ये मामले शादी के मकसद से जुड़े थे। 




इसके उलट फिरौती के लिए अपहरण के सिर्फ 84 मामले दर्ज हुए। इसी तरह का ट्रेंड पिछले चार सालों में भी देखा गया है। असम पुलिस के रिकॉर्ड बताते हुए 2016 में दर्ज हुए 6 हजार में से 5 हजार मामले महिलाओं और लड़कियों के अपहरण के हैं। पिछले 12 माह में जिन दो मामलों ने मीडिया का ध्यान खींचा,वे वर्किंग पैरेंट्स से जुड़े हैं जो अपने बच्चों को घर पर नौकरारियो के भरोसे अकेले छोड़कर चले गए थे। एक मामले में 7 साल की बच्ची को अगवा किया गया था,जिसे 24 घंटे में ही रिहा करवा लिया गया था। पिछले साल अगस्त में नौकरानी ने बच्ची को अगवा किया था।