रोहिंग्या मुस्लिमों को मोदी सरकार की ना,1300 बौद्धों को मिजोरम में दी शरण

Daily news network Posted: 2017-12-06 18:23:37 IST Updated: 2017-12-06 18:23:37 IST
रोहिंग्या मुस्लिमों को मोदी सरकार की ना,1300 बौद्धों को मिजोरम में दी शरण
  • म्यांमार में अत्याचार के शिकार लोगों को शरण देने को लेकर मोदी सरकार का दोगलापन सामने आया है। एक तरफ मोदी सरकार रोहिंग्या मुस्लिमों को भारत में शरण देने के लिए तैयार नहीं हैं

आईजोल/नई दिल्ली।

म्यांमार में अत्याचार के शिकार लोगों को शरण देने को लेकर मोदी सरकार का दोगलापन सामने आया है। एक तरफ मोदी सरकार रोहिंग्या मुस्लिमों को भारत में शरण देने के लिए तैयार नहीं हैं वहीं म्यांमार के रखाइन प्रांत से भागकर आए 1300 बौद्ध शरणार्थियों को मोदी सरकार ने मिजोरम में शरण देने की अनुमति दे दी है। म्यांमार में आतंकी संगठन अराकान आर्मी व सेना के बीच जारी जंग के चलते ये लोग अपना घर बार छोड़कर मिजोरम में घुस आए थे। आपको बता दें कि गृह मंत्रालय ने रोहिंग्या मुस्लिमों के भारत में प्रवेश को रोकने के लिए पूर्वोत्तर राज्यों को कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

भारत सरकार ने रोहिंग्या शरणार्थियों के भारत में प्रवेश को रोकने के लिए पूर्वोत्तर राज्यों को म्यांमार से लगने वाली अपनी सीमाओं को सील करने के लिए कहा था। आपको बता दें कि पूर्वोत्तर के चार राज्यों की सीमा म्यांमार से लगती है। इनमें अरुणाचल प्रदेश (520 किलोमीटर), मणिपुर (398 किलोमीटर), नागालैंड (215) और मिजोरम (510)शामिल है। इन राज्यों की म्यांमार से जो सीमा लगती है उस पर फेंसिंग भी नहीं है। भारत म्यांमार संबंधों के विशेषज्ञ मौजूदा घुसपैठ को अस्थायी मामले के रूप में देखते हैं जो रोहिंग्या मुद्दे से अलग है। मिजोरम में जिन 1300 बौद्ध शरणार्थियों के मिजोरम में प्रवेश की अनुमति दी गई है वे म्यांमार के चिन व अन्य समुदायों से ताल्लुक रखते हैं।

इन लोगों को लॉन्गतलई जिले के चार गांवों में शरण दी गई है। मिजोरम सरकार के सूत्रों के मुताबिक प्रशासन को चार गांवों के निवासियों व शरणार्थियों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक मानवीय आधार पर शरणार्थियों का पूरा ध्यान रखा जा रहा क्योंकि ये सभी अपने घर(म्यामार) में संघर्ष के कारण भागकर आए हैं। लॉन्गतलई के डिप्टी कमिश्नर टी.अरुण ने कहा कि पिछले छह दिन में ये शरणार्थी मिजोरम क्षेत्र में पहुंचे हैं। वे फिलहाल लॉन्गतलई के चार गांवों में रह रहे हैं। इन लोगों ने शेल्टर होम्स,बुद्धिस्ट होम्स, मंदिरों व अन्य जगहों में शरण ले रखी है।

अरुण ने कहा, हमारे बेसिकली दो नियम हैं। एक राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है जबकि अन्य मानवीय मदद से संबंधित हैं। मानवीय नियमों के तहत हम खाना मुहैया करा रहे हैं। हम नहीं चाहते कि किसी की भूख से मौत हो। बीमारियां ना फैलें इस पर भी हम नजर रख रहे हैं। यहां पहुंचे नए लोगों पर नजर रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस, हेल्थ वर्कर्स और डॉक्टर्स तैनात किए गए हैं। ये लोग उनकी हेल्थ कंडीशन पर नजर रखे हुए हैं। समस्या यह है कि प्रत्येक गांव की आबादी सिर्फ 200 से 400 है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का पहुंचना गंभीर चिंता का विषय है। मिजोरम के पुलिस चीफ ने जोर दिया कि हालांकि वे तुरंत इन लोगों के आगमन को सुरक्षा के लिए खतरा नहीं मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम म्यांमार में स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि उन्हें वापस वहां भेजा जा सके।

पुलिस महानिदेशक थियांघलिमा पाचुआउ ने कहा, इस मोड़ पर हम इसे सुरक्षा के लिए खतरा नहीं कहेंगे। म्यांमार में जारी लड़ाई के कारण उन्हें भारतीय क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति दी गई है। हम इसका ध्यान रख रहे हैं। पुलिस बल वहां पर तैनात है। हालांकि हम यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि शरणार्थियों के कारण ग्रामीणों के लिए कोई समस्या उत्पन्न ना हो। उन्हें चार गांवों सीमित रखा गया है। म्यांमार का मौजूदा संकट करीब दो माह बाद पुराना है।

दो माह पहले म्यांमार की सेना ने रखाइन प्रांत में रोहिंग्याओं के खिलाफ ऑपरेशन लॉन्च किया था। इस संघर्ष के चलते करीब 6 लाख से ज्यादा रोहिंग्या भागकर बांग्लादेश चले गए। संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार आयोग ने म्यांमार की सेना की कार्रवाई को जातीय सफाये का टेक्स्टबुक उदाहरण करार दिया था।