अरुणाचल प्रदेश में तैनात होंगी ये खास तोपें, चीन के छक्के छुड़ा देगी

Daily news network Posted: 2017-05-20 14:41:22 IST Updated: 2017-05-20 14:41:22 IST
अरुणाचल प्रदेश में तैनात होंगी ये खास तोपें, चीन के छक्के छुड़ा देगी
  • इन तोपों को मुख्यत: अरुणाचल प्रदेश में चीन से लगती सीमा पर तैनात करने की बात की जा रही है। ऐसे में1986 में बोफोर्स तोप के बाद अब सेना को एक कारगर तोप मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

नई दिल्ली।

 आखिरकार लंबे इंतजार के बाद एम-777 हॉवित्जर तोपें भारतीय सेना को मिलनी शुरु हो चुकी हैं। फिलहाल पोखरण रेंज में इनका परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण के बाद इन तोपों को सेना में शामिल कर लिया जाएगा। इन तोपों को मुख्यत: अरुणाचल प्रदेश में चीन से लगती सीमा पर तैनात करने की बात की जा रही है। ऐसे में1986 में बोफोर्स तोप के बाद अब सेना को एक कारगर तोप मिलने का रास्ता साफ हो गया है।



2900 करोड़ की इस डील के तहत अमरीका भारत को 145 नई तोपें देगा। इनमें 25 तोपें बनी-बनाई खरीदी जाएंगी, जबकि अन्य तोपों का इसकी सहयोगी कंपनी महिंद्रा डिफेंस द्वारा भारत में असेंबल किया जाएगा। ऑप्टिकल फायर कंट्रोल वाली हॉवित्जर से तकरीबन 40 किलोमीटर दूर स्थित टारगेट पर सटीक निशाना साधा जा सकता है। डिजिटल फायर कंट्रोल वाली यह तोप एक मिनट में 5 राउंड फायर करती है।



होवित्जर की खासियत 4155 एमएम की होवित्जर तोप 40 किलोमीटर तक सटीक मार कर सकती हैं। इसके अलावा इन्हें ऑपरेट करना बेहद आसान है। हॉवित्जर तोपें अन्य तोपों के मुकाबले हल्की हैं। इनको कहीं पर साधारण तरीके से पहुंचाया जा सकता है। इन्हें हेलीकॉप्टर से भी ढोया जा सकता है। बोफोर्स के मुकाबले होवित्जर तोपों का वजन काफी कम है। इसकी वजह है कि इनके निर्माण में टाइटेनियम का प्रयोग होता है। बोफोर्स का वजन जहां 13,100 किग्रा है वहीं इसका महज 4,200 किलोग्राम है। मारक क्षमता के लिहाज से हॉवित्जर को दुनिया की सबसे कारगर तोपों में इनका नाम आता है।



जून 2006 में हॉवित्जर तोपों को खरीदने के लिए अमरीका के साथ बातचीत शुरू हुई। अगस्त 2013 में अमरीका ने हॉवित्जर का नया वर्जन देने की पेशकश की, जिसकी कीमत 885 मिलियन डॉलर थी। भारत ने करीब दस वर्ष पहले इन तोपों के लिए अमेरिका से मांग की थी। यूएस आर्मी और यूएस मरीन कॉर्प्स ने एम777 को वर्ष 2005 में शामिल किया था। आज ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और सऊदी अरब की सेनाएं इनका प्रयोग कर रही हैं। इन तोपों को ने अफगानिस्तान की लड़ाई में पहली बार अपनी ताकत परखी थी और दुश्मन को धूल चटाई थी। 



गौरतलब है कि बोफोर्स डील में हुए विवाद के बाद 1980 के बाद से इंडियन आर्मी की आर्टिलरी में कोई नई तोप शामिल नहीं की गई। फिलहाल भारत बोफोर्स का अपग्रेडेड वर्जन धनुष तैयार कर रहा है। इसकी फाइनल ट्रायल चल रही है। 1260 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट में 114 तोपों का ट्रायल चल रहा है, जबकि जरूरत 414 तोपों की है।



इस तोप को तैनात करने के पीछे भारत का मकसद चीन से लगती सीमा पर अपनी सुरक्षा को चाक चौबंद करना है। इसके अलावा भारत चीन की सीमा पर कई माध्यमों के जरिए सुरक्षा को पुख्ता रूप देने में लगा है। इसके तहत ही भारत ने कुछ समय पहले अरुणाचल प्रदेश की खाली पड़ी एयरफील्ड पर अपना लड़ाकू विमान उतारा था। वहीं भारत अरुणाचल प्रदेश में ब्रहमोस मिसाइल को तैनात करने की बात कह चुका है, जिससे चीन खासा डरा हुआ है। ऐसे में होवित्जर की तैनाती भी उसके लिए कुछ परेशानी जरूरी बढ़ाने में मददगार साबित होगी।