चीन-पाक से निपटने में जुटी सेना, मांगे 27 लाख करोड़

Daily news network Posted: 2017-07-17 13:43:02 IST Updated: 2017-07-17 13:43:02 IST
चीन-पाक से निपटने में जुटी सेना, मांगे 27 लाख करोड़
  • केंद्रीय रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने भरोसा दिया कि आधुनिकीकरण पर निवेश को प्राथमिकता दी जाएगी

नई दिल्ली।

चीन और पाकिस्तान से खतरे से निपटने और भारतीय हितों के विस्तार के लिए सेनाओं के आधुनिकीकरण की जरूरत है। इसको ध्यान में रखकर सशस्त्र बलों ने सरकार से अगले पांच साल में 27 साल करोड़ रुपए आवंटित करने मांग की है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, दस और ग्यारह जुलाई को यूनिफाइड कमांडर्स कॉफ्रेंस में पांच साल (2017-2023) 13वां संयुक्त रक्षा प्लान पेश किया गया, जो 26,83,924 करोड़ रुपए का है। 



इसमें डीआरडीओ सहित सभी हितधारकों को शामिल किया गया है। सूत्रों के मुताबिक सशस्त्र बलों ने 13वें प्लान को जल्द सहमति प्राप्त करने पर जोर दिया, क्योंकि उनका वार्षिक अधिग्रहण प्लान इसी पर निर्भर ह। सुरक्षाबलों ने रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी की मांग ऐसे समय में रखी है जब सिक्किम में चीन के साथ टकराव चल रहा है और नियंत्र रेखा पर पाकिस्तान के साथ लगभग हर दिन गोलीबारी हो रही है। 



कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने भरोसा दिया कि आधुनिकीकरण पर निवेश को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने आर्मी को भरोसा दिलाया कि सेना का आधुनिकीकरण जरूरी है, लेकिन यह भी सच है कि वास्तविक वार्षिक रक्षा बजट में गिरावट की वजह से आधुनिकीकरण बजट लटका हुआ है और इसका सीधा मतलब है कि सेना, नौसेना और भारतीय वायुसेना अभी भी महत्वपूर्ण परिचालन घाटे से जूझ रही है। मौजूदा समय में भारत का रक्षा बजट 2.74 लाख करोड़ रुपए है, जो कि जीडीपी का 1.56 फसदी है। यह 1962 में चीन के खिलाफ युद्ध के बाद से न्यूनतम आंकड़ा है। 



सेना चाहती है कि रक्षा बजट को बढ़ाकर जीडीपी के दो फीसदी किया जाए। 13वें रक्षा प्लान के मुताबिक 12,88,654 करोड़ रुपए पूंजी लागत और 13,95,271 करोड़ रुपए राजस्व खर्च के लिए रखे गए हैं। चीन पर नजर रखते हुए प्लान में अंडमान निकोबार कमांड के क्षमता विकास के लिए अलग से सेक्शन रखा गया है, जिसका गठन अक्टूबर 2001 में किया गया था।