रेलवे ने बदले नियम, ट्रेन में यात्रा करने से पहले जान लें

Daily news network Posted: 2017-04-21 11:21:54 IST Updated: 2017-04-21 11:21:54 IST
रेलवे ने बदले नियम, ट्रेन में यात्रा करने से पहले जान लें
  • रेलवे सभी तरह की ट्रेनों से एसी-2 कोच धीरे धीरे खत्म कर देगा। इनकी जगह एसी-3 कोच बढ़ाए जाएंगे।

नई दिल्ली।

रेलवे सभी तरह की ट्रेनों से एसी-2 कोच धीरे धीरे खत्म कर देगा। इनकी जगह एसी-3 कोच बढ़ाए जाएंगे। यही नहीं नॉन एसी स्लीपर कोच की संख्या घटाकर भी एसी-3 कोच बढ़ाए जा सकते हैं। कम रिस्पॉन्स के चलते 143 ट्रेनों में फ्लैक्सी फेयर सिस्टम को भी वापस लिया जा सकता है। इसकी जगह सभी ट्रेनों के बेसिक फेयर में 10 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी की जा सकती है।  

मंथली सीजनल टिकट का किराया भी बढ़ाया जा सकता है। जल्दी टिकट कैंसल करने के नियमों में भी बदलाव किया जाएगा। ट्रेन लेट होने पर पैसेंजर्स को इसकी जानकारी एसएमएस पर दी जाएगी। चार दर्जन से अधिक ट्रेनों की पहचान कर उन्हें समय से चलाने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे। राजधानी,दुरंतो,शताब्दी ट्रेनों में फ्लैक्सी फेयर सिस्टम का भी रिव्यू किया जा रहा है। इस सिस्टम को बंद करने और इसके बदले में ऑप्शनल सिस्टम लाने पर विचार हो रहा है। यह भी सोचा जा रहा है कि सभी ट्रेनों के बेसिक फेयर में 10 से 15 फीसदी का इजाफा किया जाए। 

फ्लैक्सी फेयर यानी कम होती सीटों के साथ बढ़ता किराया। पिछले साल सितंबर में रेलवे ने एविशन सेक्टर की तर्ज पर इसकी शुरुआत की थी। 163 साल में पहली बार ट्रेनों में ऐसा सिस्टम शुरू हुआ था। 54 दुरंतो,42 राजधानी और 46 शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों में यह लागू किया गया था। बीते दिसंबर में जब फुल एसी हमसफर ट्रेन की शुरुआत हुई तो उसमें भी फ्लैक्सी फेयर सिस्टम लागू किया गया। इस तरह अभी कुल 143 ट्रेनों में यह सिस्टम है। उदाहरण के तौर पर राजधानी एक्सप्रेस में हर 10 फीसदी सीटें बुक होने पर बेसिक फेयर 10 प्रतिशत बढ़ता है। रेलवे बोर्ड  के आधिकारिक सूत्रों ने बताया है कि रेलवे की 13 हजार पैसेंजर ट्रेनों में धीरे धीरे एसी-2 कोच कम होंगे। फिर इन्हें खत्म किया जाएगा। 


जिन पैसेंजर ट्रेनों में अभी 20 या 22 कोच लगते हैं, उन्हें बढ़ाकर 24 करने का फैसला हुआ है। ऐसा ट्रेनों में जो एक्सट्रा कोच बढ़ाए जाएंगे,वो एसी-3 के ही रहेंगे। रेलवे का तर्क है कि एसी-2 के लिए उसी समय मांग होती है जब एसी-3 में जगह नहीं होती। स्लीपर में चलने वाले करीब 30 से 40 फीसदी यात्री अब एसी-3 का सफर चाहने लगे हैं। एसी-2 के मुकाबले एसी-3 में 26 पैसेंजर ज्यादा आएंगे। इससे रेलवे को भीड़ का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। इससे स्लीपर के पैसेंजर एसी-3 में चले जाएंगे, जिससे रेलवे की आमदनी भी बढ़ेगी।