असम: 34 करोड़ के विज्ञापन घोटाले में विजिलेंस सेल को मिली बड़ी कामयाबी

Daily news network Posted: 2017-11-13 16:05:27 IST Updated: 2017-11-13 16:05:27 IST
असम: 34 करोड़ के विज्ञापन घोटाले में विजिलेंस सेल को मिली बड़ी कामयाबी
  • असम के 34 करोड़ के विज्ञापन घोटाले की जांच में मुख्यमंत्री की स्पेशल विजिलेंस सेल को बड़ी कामयाबी मिली है।

गुवाहाटी।

असम के 34 करोड़ के विज्ञापन घोटाले की जांच में मुख्यमंत्री की स्पेशल विजिलेंस सेल को बड़ी कामयाबी मिली है। सरकार की उपलब्धियों के प्रचार के लिए सूचना व जनसंपर्क निदेशालय की ओर से 606 होर्डिंग्स लगाए गए थे। स्पेशल विजिलेंस टीम इनमें से 406 होर्डिंग्स का पता लगाने में विफल रही है।


असम में 2016 के विधानसभा चुनाव से पहले विजन असम, मिशन असम कैंपेन के तहत तरुण गोगोई सरकार की उपलब्धियों को हाईलाईट करने के लिए होर्डिंग्स लगाए गए थे। आधिकारिक सूत्र का कहना है कि 406 जगहों पर न तो होर्डिंग मिले और न ही फ्रेम। अत: पर्याप्त प्रथम दृष्ट्या सबूत है जिससे यह पता चलता है कि बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ था। होर्डिंग्स लगाने के लिए सूचना व जनसंपर्क निदेशालय ने निजी फर्म ब्रह्मपुत्र टेलीविजन नेटवर्क(बीटीएम)को ठेका दिया था। आरोप है कि बीटीएम ने अधिकारियों के साथ मिलकर फंड्स का दुरुपयोग किया।


सूत्र का कहना है कि ब्रोशर, लीफ्लिट व फोल्डर्स के वितरण को लेकर बीटीएम के पास कोई प्लान नहीं था। घर घर वितरण नहीं हुआ। वितरण के नाम पर बल्क में सामग्री बाजार में डम्प कर दी गई। 29 फरवरी 2016 को सूचना व जनसंपर्क निदेशाल के अधिकारियों के साथ मिलकर जल्दबाजी में बिल तैयार किए गए और पेमेंट उठा लिया गया। बीटीएम की प्रोपराइटर अंजना बोरा और उनके पति राजीव जो फर्म के रोजमर्रा के काम देखते हैं, ने गिरफ्तारी से बचने के लिए गुवाहाटी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दोनों ने अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की। 2 नवंबर को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।


हालांकि बीटीएम का कहना है कि सभी होर्डिंग्स समझौते के मुताबिक लगाए गए थे और लगाए जाने के बाद गायब हुए होर्डिंग्स के लिए वे जिम्मेदारा नहीं है। सूचना व जनसंपर्क विभाग के निदेशक रंजीत गोगोई को 7 नवंबर को विजिलेंस सेल ने गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह न्यायिक अभिरक्षा में हैं। सूत्र का कहना है कि फाइन नोटिंग्स से यह स्पष्ट है कि कैंपेन को लागू करने के संबंध में फैसले अकेले रंजीत गोगोई ने लिए थे। सूचना व जनसंपर्क निदेशालय के अधिकारियों की इसमें कोई भूमिका नहीं है। हां, उन्होंने रंजीत गोगोई के फैसलों की पालना जरूर की थी। विजिलेंस सेल ने पिछले महीने जो एफआईआर दर्ज की थी उसमें बीटीएम के अलावा दो अन्य विज्ञापन एजेंसियों के नाम दर्ज हैं। ये हैं डेल्टा पब्लिसिटी और प्रदीप एडवरटाइजमेंट।