बेहद अद्भुत है राजस्थान का ये मंदिर, यहां चिट्ठी से पूरी होती है हर कामना

Daily news network Posted: 2017-10-11 17:08:51 IST Updated: 2017-10-11 17:08:51 IST
बेहद अद्भुत है राजस्थान का ये मंदिर, यहां चिट्ठी से पूरी होती है हर कामना
  • भारत एक ऐसा देश है, जहां जगह-जगह आस्था और विश्वास के कई केंद्र मिल जाते हैं। एक ऐसी ही आस्था की जगह राजस्थान के रणथंभौर में हैं

नई दिल्ली।

भारत एक ऐसा देश है, जहां जगह-जगह आस्था और विश्वास के कई केंद्र मिल जाते हैं। एक ऐसी ही आस्था की जगह राजस्थान के रणथंभौर में हैं, जहां इंटरनेट, ई-मेल और फोन के जमाने में लोग चिट्ठियां भेजा करते हैं। खासबात यह है कि इन चिट्ठियों को भगवान गणेश के लिए भेजा जाता है। इसलिए यहां हमेशा भगवान के चरणों में चिठ्ठियों और निमंत्रण पत्रों का ढेर लगा रहता है।

यहां भगवान गणेश की मूर्ति बाकी मंदिरों से कुछ अलग है। मूर्ति में भगवान की तीन आंखें हैं। गणेश जी अपनी पत्नी रिद्धि-सिद्धि और अपने पुत्र शुभ-लाभ के साथ विराजमान हैं। गणनायक का वाहन चूहा भी साथ में है। यहां गणेश चतुर्थी पर धूमधाम से उत्सव मनाया जाता है और विशेष पूजा अर्चना की जाती है।

कहते हैं कि यहां जो भी अपनी दुख बताता है उसे वे दूर करते हैं। लोग लेटर के जरिए अपनी मन्नत भी भेजते हैं जो पूरी हो जाती है। ऐसे में यहां जंगल में दुर्गम पहाड़ी पर चलकर हर रोज डाकिया कार्ड और लेटर लाता है। पुजारी लोगों की व्यथा और मन्नत के साथ उनके निमंत्रण को पढ़कर गणेशजी को सुनाते हैं और उनके चरणों में समर्पित कर देते हैं।

बताते हैं कि गणेश की ये मूर्ति तराशी हुई नहीं है बल्कि खुद ब खुद एक चट्टान के रूप में मिली है। गणेश जी के तीन नेत्र हैं। भारत में ये अपने आप में अनोखा मंदिर है। ऐसे में मुगल काल से ही लोगों में इस मंदिर के प्रति भारी आस्था थी। मुगलकाल में भी लोग यहां जाकर दर्शन करते और मांगलिक कार्यों में निमंत्रण भी देते थे। घुड़़सवार यहां राजाओं के निमंत्रण लेकर आया करते थे। अंग्रेजों के जमाने में डाक व्यवस्था शुरु होने के बाद लोग घर बैठे निमंत्रण पत्र और अपनी व्यथा लेटर के जरिए भेजने लगे।


ये मंदिर 10वीं सदी में रणथंभौर के राजा हमीर ने बनवाया था। युद्ध के दौरान राजा के सपने में गणेशजी आए और उन्हें आशीर्वाद दिया। राजा की युद्ध में विजय हुई और उन्होंने किले में मंदिर का निर्माण करवाया।