पत्रकार शांतनु भौमिक हत्याकांड को लेकर त्रिपुरा विधानसभा में हंगामा

Daily news network Posted: 2017-11-14 12:36:44 IST Updated: 2017-11-14 12:36:44 IST
पत्रकार शांतनु भौमिक हत्याकांड को लेकर त्रिपुरा विधानसभा में हंगामा
  • त्रिपुरा विधानसभा का दो दिवसीय शीतकालीन सत्र सोमवार को शुरू हो गया। कहा जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह सत्र आखिरी होगा। त्रिपुरा में अगले साल फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है।

अगरतला।

त्रिपुरा विधानसभा का दो दिवसीय शीतकालीन सत्र सोमवार को शुरू हो गया। कहा जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह सत्र आखिरी होगा। त्रिपुरा में अगले साल फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है। विधानसभा सत्र के पहले दिन टीवी न्यूज चैनल दिनरात के पत्रकार शांतनु भौमिक की हत्या के मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने आरोप लगाया कि पत्रकार शांतनु भौमिक हत्याकांड की सीबीआई से जांच की सिफारिश करने में सरकार की कोई दिलचस्पी नहीं है। कांग्रेस विधायक रतन लाल नाथ ने कहा, राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष जांच टीम(एसआईटी)विफल साबित हुई है। पत्रकार और विपक्ष सीबीआई जांच के लिए दबाव बना रहा है, इसके बावजूद सीबीआई जांच की सिफारिश क्यों नहीं की जा रही। आखिर सीबीआई जांच की अनुमति देने में दिक्कत क्या है?

मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए सीबीआई जांच की सिफारिश करने से साफ इनकार कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को एसआईटी में पूरा भरोसा है। सरकार ने कहा, हमें पूरा विश्वास है कि जांच के दौरान पूरा सच सामने आएगा। 3 सदस्यीय एसआईटी जिसमें जिम्मेदार अधिकारी शामिल हैं, उन्हें जांच प्रक्रिया पूरी करने दीजिए। मेरा मानना है कि एसआईटी शांतनु भौमिक हत्याकांड को सॉल्व करने में सक्षम है।

हालांकि मुख्यमंत्री ने त्रिपुरा में मीडिया कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई नया कानून लाने की किसी योजना के बारे में टिप्पणी नहीं की। विपक्ष के विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने आरोप लगाया कि 23 अगस्त 2016 को अगरतला में इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी)की रैली के दौरान हुए संघर्ष की न्यायिक जांच कराने में सरकार विफल रही है। इस पर मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने कहा कि पुलिस को जांच तेज करने के लिए कहा गया है। रॉय बर्मन ने पूर्व उग्रवादी नेता और एटीटीएफ के चीफ रंजीत देबबर्मा की गिरफ्तारी में सरकार के इरादे को लेकर भी सवाल खड़ा किया।