रेगिस्तान में भी छिपा है हिल स्टेशन, चलिए आपको इस रोमांचक जगह की करवाते हैं सैर...

Daily news network Posted: 2018-01-10 18:30:12 IST Updated: 2018-01-10 18:30:12 IST

माउंट आबू राजस्थान का एक मात्र हिल स्टेशन है, इसे राजस्थान का स्वर्ग भी कहा जाता है। दक्षिणी राजस्थान के सिरोही जिले में गुजरात की सीमा से सटा और अरावली की पहाडिय़ों पर बसे हुए इस हिल स्टेशन की सुंदरता देखते ही बनती है। माउंट आबू केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि गुजरात के लिए भी हिल स्टेशन की पूर्ति करता है। माउंट आबू से बहुत सी पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार यह वही स्थल है, जहां महान ऋषि वशिष्ठ रहा करते थे। चलिए आपको माउंट आबू की सैर करवाते हैं।


दिलवाड़ा जैन मंदिर- दिलवाड़ा जैन मंदिर पांच मंदिरों का एक समूह है और सभी पांच मंदिर एक दूसरे से भिन्न हैंए दिलवाड़ा का जैन मंदिर माउंट आबू से ढाई किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं इन मंदिरों का निर्माण ग्यारहवीं और तेरहवीं शताब्दी के बीच हुआ था। सफेद संगमरमर से निर्मित खूबसूरती और नक्काशी के बेमिसाल नमूने ये मंदिर स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।


गुरु शिखर- गुरु शिखर अरावली पर्वत श्रृंखला की सबसे ऊंची चोटी है। इस श्रृंखला की सुंदरता देखते ही बनती है। श्रृंखला पर बना मंदिर भगवान विष्णु के अवतार दत्तात्रेय को समर्पित है। मंदिर में जाकर आपको जो शांति मिलेगी उसे शायद ही आप कभी भूल पाएं। शहर से 15 किलोमीटर दूर राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन की यह सबसे ऊंची चोटी है।


गौमुख मंदिर- यहां के गौमुख मंदिर तक पहुंचने के लिए घाटी में 750 सीढिय़ां चढऩी पड़ती हैं। माउंट आबू के नीचे आबू रोड की तरफ संगमरमर की गाय के मुंह से एक छोटी नदी बाहर आती है। कहा जाता है कि ऋषि वशिष्ठ ने धरती को राक्षसों से बचाने के लिए एक यज्ञ का आयोजन किया था और उस यज्ञ के हवन.कुंड में से चार अग्निकुल राजपूत उत्पन्न किए थे। इस यज्ञ का आयोजन आबू के नीचे एक प्राकृतिक झरने के पास किया गया था।


ब्रह्म कुमारी शांति पार्क - यह उद्यान बहुत ही शांत और खूबसूरत है। इसके प्राकृतिक वातावरण में शांति और मनोरंजन दोनों का एक साथ आनंद लिया जा सकता है। शांति पार्क अरावली पर्वत की 2 विख्यात चोटियों के बीच बना हुआ है। यह पार्क माउंट आबू में ब्रह्म कुमारी मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थल है।


नक्की झील- नक्की झील के बारे में कई दंत कथाएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि एक हिंदू देवता ने अपने नाखूनों से खोदकर ये झील बनाई थी, वहीं कहा जाता है कि एक राक्षस ने अपने छुपने की जगह बनाने के लिए इसे खोदा था। जिसके बाद इस झील का नाम नक्की पड़ गया।


सनसेट प्वाइंट- नक्की झील से कुछ ही दूरी पर बहुत लोकप्रिय सनसेट प्वांइट है। सनसेट प्वांइट से डूबते हुए सूरज का खूबसूरत नजारा देखा जा सकता है। दूर.दूर से पर्यटक इस नजारे को देखने के लिए आते हैं। यहां सूर्यास्त के दृश्य को देखने के लिए हर शाम भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं।