हिमंता ने मदनी के साथ मंच साझा करने वाले गोहेन को बताया बेईमान

Daily news network Posted: 2017-11-15 18:32:46 IST Updated: 2017-11-15 18:32:46 IST
हिमंता ने मदनी के साथ मंच साझा करने वाले गोहेन को बताया बेईमान
  • असम के वित्त मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को राजनीतिकि विश्लेषक व लेखक हिरेन गोहेन को सांप्रदायिक राजनीतिक नेता बताया।

गुवाहाटी।

असम के वित्त मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को राजनीतिकि विश्लेषक व लेखक हिरेन गोहेन को सांप्रदायिक राजनीतिक नेता बताया। हिमंता ने सोशल मीडिया पर गोहेन के बारे में यह बात लिखी। सरमा ने ट्विट किया कि असम के मशहूर दैनिक समाचार पत्र ने हिरेन गोहेन की तारीफ करते हुए उन्हें असमिया समाज के गार्जियन के रूप में चित्रित किया था। ऐसा कर समाचार पत्र ने गलती की है।

समाचार पत्र को अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए और इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। नई दिल्ली के कांस्टिट्यूशन क्लब में गोहेन ने जमीयत उलेमा ए हिंद के चीफ मौलाना अरशद मदनी के साथ मंच साझा किया था। मदनी ने असम में जारी एनआरसी प्रक्रिया को लेकर विवादित बयान दिए थे। मदनी के साथ मंच साझा करने के कारण गोहेन की पूरे राज्य में आलोचना हो रही है। इससे पहले हिमंता बिस्वा सरमा ने गोहेन को ओपन टीवी डिबेट की चुनौती दी। सरमा ने गोहेन को बौद्धि रूप से बेईमान कहा था। गोहेन ने राज्य में दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर कॉलेज खोले जने का विरोध किया था। इसी को लेकर सरमा ने उन्हें बौद्धिक रूप से बेईमान करार दिया। नई दिल्ली में सोमवार को पब्लिक मीटिंग के दौरान मदनी ने कहा था, अगर पंचायत की ओर से जारी निवास प्रमाण पत्र को नागरिकता के दावे के लिए वैध दस्तावेज नहीं माना जा रहा है

तो लाखों महिलाएं जो असम की मूल निवासी हैं, उनकी राष्ट्रीयता से वंचित रह जाएगी। इससे भारत दूसरे म्यांमार में बदल जाएगा। मदनी ने कहा था, केन्द्र व राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारें आने के बाद प्रमाण पत्रों की समस्या खड़ी हुई है। एनआरसी से महिलाओं को हटाने के लिए जमीन तैयार करने के वास्ते कोशिशें की जा रही है। ऐसी 48 लाख महिलाएं हैं। वे उनकी राष्ट्रीयता से वंचित हो जाएगी। इन लोगों को भारत से धकेल दिया जाएगा। म्यांमार में जो हालात हैं, वे अब भारत को दूसरा म्यांमार बनाना चाहते हैं। मदनी ने महिलाओं की जो संख्या बताई थी गोहेन उससे सहमत नहीं थी। उन्होंने कहा, हालात को लेकर मदनी जी ने जो कुछ कहा, हम उससे सहमत हैं लेकिन सवाल 27 लाख महिलाओं का है, 48 लाख का नहीं। आपको बता दें कि गुवाहाटी के एक पत्रकार ने मंगलवार को मदनी व गोहेन के खिलाफ बसिस्था पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

एनआरसी अपडेट पर कथित सांप्रदायिक बयानों को लेकर यह शिकायत दर्ज कराई गई है। नाथ ने कहा कि उन्होंने अपनी शिकायत में लिखा है कि मदनी ने जो बयान दिए थे उनसे असम में सांप्रदायिक सौहार्द पर प्रभाव पड़ सकता है और गोहेन ने उनका समर्थन किया था। बकौल नाथ, मदनी ने राज्य सरकार की भी आलोचना की थी लेकिन एनआरसी अपडेट की सुप्रीम कोर्ट प्रत्यक्ष रूप से निगरानी कर रहा है। इसलिए राज्य सरकार का सेकेण्ड्री व निष्क्रिय भूमिका है। असम भाजपा के प्रवक्ता मनोज बरुआ ने मंगलवार को मदनी की आलोचना करते हुए कहा, कई तकते हैं जो एनआरसी अपडेट को रोकने की कोशिश कर रही है। मदनी के बयानों से असम के तबाह होने का संदेश गया है। हम इसे सहन नहीं करेंगे। हम गोहेन की भूमिका से हैरान हैं।

वह सम्मानित बुद्धिजीवी हैं। सरकार को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। असम गण परिषद के प्रवक्ता मनोज सैकिया ने कहा, मदनी और कांग्रेस एनआरसी अपडेट को विफल करने के लिए सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न करने की कोशिश कर रही है। 24 मार्च 1971 की मध्य रात्रि के बाद जिन अवैध प्रवासियों ने राज्य में प्रवेश किया था, चाहे उनका कोई भी धर्म हो, उन्हे जाना होगा। वार्ता समर्थक उल्फा नेता अनूप चेतिया ने कहा, मदनी विभिन्न समुदायों के बीच सौहार्द को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। जिन्हें खुद को असमिया कहने में शर्म आती है उन्हें राज्य छोड़कर चले जाना चाहिए। हम लोगों से उन पर विश्वास नहीं करने को कहा है। इंटेलेक्चुअल अब्दुल मन्नन जो दिल्ली में हुई मीटिंग में मौजूद थे, ने कहा, मदनी और गोहेन के भाषणों में कुछ भी विवादित नहीं है। हमने सिर्फ असम के मौजूदा हालात और अल्पसंख्यक लोग जो खतरा महसूस कर रहे हैं, उस पर चर्चा की। आपको बता दें कि गोहेन पहले ही कह चुके हैं कि मदनी के बयान उनके निजी विचार हैं।