पूर्वोत्तर का विकास देश के लिए महत्वपूर्ण: सुमित्रा महाजन

Daily news network Posted: 2017-06-16 08:48:45 IST Updated: 2017-06-16 08:48:45 IST
पूर्वोत्तर का विकास देश के लिए महत्वपूर्ण: सुमित्रा महाजन
  • लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने पूर्वोत्तर क्षेत्र को सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार इस क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है

इम्फाल।

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने पूर्वोत्तर क्षेत्र को सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार इस क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है और यह क्षेत्र एशिया के विकास में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। महाजन ने मणिपुर की राजधानी इम्फाल में विधानसभा भवन परिसर में 16वें उत्तर-पूर्वी क्षेत्र राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन (एनईआरसीपीए) का उद्घाटन करते हुए कहा कि क्षेत्र में विकास के जो कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, वे महत्वपूर्ण हैं और उनके जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा को भी सुनिश्चित किया जा सकता है। 

उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में अपार प्राकृतिक संसाधन हैं, जिनका इस्तेमाल विकास में महत्वपूर्ण साबित होगा। इस क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए 'एक्ट ईस्ट नीति' को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रयासों में यह क्षेत्र एशिया के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और व्यापार, वाणिज्य और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए म्यांमार के जरिए सरकार की दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ सड़क और बंदरगाह संपर्क बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना है। 

महाजन ने विधायकों से कहा कि वे अपने विधायी दायित्वों का प्रभावी ढंग से संचालन के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की राय लें। एक सदस्य और अध्यक्ष के रूप में उन्होंने देखा है कि देश के समक्ष मौजूद स्थितियों और संसद में विचार के लिए आने वाले अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों को समझने में सदस्यों को कठिनाई हो रही थी। इसके समाधान के लिए उन्होंने कई मुद्दों के बारे में सदस्यों को जानकारी देने के लिए विषय के विशेषज्ञों की सहायता लेने का निर्णय लिया और फिर जुलाई 2015 में लोकसभा सचिवालय में अध्यक्षीय शोध कदम (एसआरआई) की स्थापना की गई। 

उन्होंने कहा कि एसआरआई का उद्देश्य दीर्घकालिक महत्त्व और सामरिक नीति के प्रमुख क्षेत्रों का पता लगाने के साथ-साथ उच्च गुणवत्तापूर्ण शोध सामग्री तैयार करना, जानकारी प्रदान करने और क्षमता निर्माण के लिए संसद के दोनों सदनों के सदस्यों के साथ बातचीत के लिए उपयुक्त तंत्र विकसित करना है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि इस तरह का कार्य करने से पूर्वोत्तर के विधायकों को बहुत मदद मिलेगी।