कश्मीर पर पीएम की दो टूक, जान बचाकर भी पत्थर खाते हैं हमारे फौजी

Daily news network Posted: 2017-04-21 14:47:23 IST Updated: 2017-04-21 15:32:32 IST
कश्मीर पर पीएम की दो टूक, जान बचाकर भी पत्थर खाते हैं हमारे फौजी
  • पीएम ने कहा, आप में से ही कुछ लोग जब कश्मीर में बाढ़ आने पर लोगों की मदद करते हैं तो आपको वहां तालियां भी मिलती हैं

नई दिल्ली।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नौकरशाहों को लीक से हटकर काम करने का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें बिना किसी भय और पक्षपात के काम करते हुए जनता के हितों में फैसले लेने चाहिए तथा इस दिशा में उन्हें हर तरह का समर्थन मिलेगा। मोदी ने यहां सिविल सेवा दिवस पर शीर्ष अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि मैं हमेशा आपके साथ हूं और राजनीतिक स्तर पर इच्छा शक्ति की कोई कमी नहीं है बल्कि ईमानदार और कर्मठ नौकरशाहों को समर्थन देने के लिए उनका प्रशासन अतिरिक्त इच्छा शक्ति रखता है।


इस दौरान पीएम ने कहा, आप में से ही कुछ लोग जब कश्मीर में बाढ़ आने पर लोगों की मदद करते हैं तो आपको वहां तालियां भी मिलती हैं। भले ही बाद में वे ही लोग आपको पत्थर मारें, लेकिन कुछ समय के लिए उनके मन में भी आता है कि ये लोग हमारे लिए जान दे सकते हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने अधिकारियों से कहा कि अधिकारी चाहें तो क्या संभव नहीं हो सकता है। अगर एक अधिकारी तय कर ले कि उनके इलाके से गंगा में कोई गंदगी नहीं डाली जाएगी, तो गंगा को कोई गंदा नहीं कर सकता।


प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका मानना है कि अब सही समय आ चुका है जब नौकरशाहों को लीक से हटकर फैसले लेने चाहिए तथा अपने आपको वर्षों से चले आ रहे ढर्रे से बचाना चाहिए तथा निर्णय लेने में त्वरित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह बदलाव, काम करने और सुधार का एक विशेष मौका है और इसके लिए राजनीतिक इच्छा शक्ति की जरूरत है। नौकरशाही का काम बेहतर तरीके से कार्य करना है और जनता की सहभागिता से ही बदलाव संभव हो सकता है। उन्होंने नौकरशाहों से कामकाज के तरीकों में जोरदार बदलाव की वकालत करते हुए कहा कि अधिकारियों को नियामक की भूमिका के बजाय समर्थ की भूमिका अदा करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए प्रतिस्पर्धा बहुत जरूरी है और प्रशासनिक तंत्र में पूरे स्तर पर बदलाव की आवश्यकता है।


एम मोदी ने अफसरों को कमर कसकर काम करने की सलाह देते हुए कहा कि सरकारें आती-जाती रहेंगी, लेकिन व्यवस्था हमेशा लागू रहेगी। पीएम ने कहा, आज स्थितियों को बदलने का अवसर आया है। सत्यनिष्ठा से काम होना चाहिए, मैं आपके साथ खड़ा हूं। उस वक्त को याद कीजिए, जब आपने सिविल सेवा परीक्षा पास की थी तो क्या सपने थे, क्या उसमें कोई बदलाव आया है। पीएम ने उदाहरण देते हुए कहा कि सिर्फ गड्ढा खोदने और भरने से काम नहीं चलेगा, पेड़ भी लगाना चाहिए। हम जो कर रहे हैं उसका नतीजा निकलना चाहिए और नतीजे को हर तराजू पर तौलना चाहिए।